अल्मोड़ा-जाखनदेवी क्षेत्र में हुए सीवर लाइन के कार्य ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है।धूल से भरी सड़क में लोगों का चलना मुश्किल हो गया है, लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। बारिश पड़ती है तो यह सड़क कीचड़ से लबालब दलदल में तब्दील हो जाती है।गाड़ियां चलने से सड़क की धूल उड़ रही है जिससे सड़क पर पर चलना कठिन हो गया है।व्यापारियों का व्यापार चौपट हो रहा है।स्थानीय से लेकर राह चलते लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।इस प्रकरण में राजनीति तो बहुत हुई लेकिन वो केवल धरने तक ही सिमट कर रह गयी।विभागीय अधिकारियों के आश्वासन पर धरने समाप्त हो गये लेकिन सड़क को आज भी डामरीकरण की दरकार है।ऐसा प्रतीत होता है कि यह सड़क क्षेत्र के लोगों ने सम्बंधित विभाग से समस्या से निजात दिलाने की कई बार मांग की,लेकिन कोई प्रगति नहीं है। नगर की माल रोड में शिखर तिराहे से जाखनदेवी तक सीवर लाइन बिछाने का कार्य जनवरी माह से शुरू हुआ था जिसे जनवरी माह में पूरा हो जाना था लेकिन कछुवा गति से चला कार्य फरवरी माह के समापन के साथ पूरा हुआ।सीवर लाइन,चैम्बर के लिए सड़क खोदी गई थी जिससे सड़क पर गड्ढे हो गए थे।सड़क पर कई लोग रपटकर चोटिल हुए लेकिन विभाग ने कोई सुध नहीं ली।बाद में कहीं जाकर कार्यदाई संस्था ने सड़क पर सोइलिंग करवाई।पूर्व में कहा जा रहा था कि जाड़े का मौसम बीतने पर सड़क की हालत सुधारी जाएगी।लेकिन अप्रैल माह का चौथा सप्ताह पूरा होने को है लेकिन सड़क का कार्य शुरू नहीं हुआ है।यहाँ इस कार्य में बड़ी दिक्कत रही जहाँ सीवर लाइन की कार्यदाई संस्था जल निगम और लोक निर्माण विभाग के बीच सामन्जस्य नहीं बैठ पाया। जल निगम द्वारा सड़क के लिए दिए गए मुआवजे को लोक निर्माण विभाग ने कम बताया जिस पर विभागों ने इस पर वार्ता की जिसका निष्कर्ष निकला कि सड़क में डामरीकरण का कार्य जल निगम द्वारा करवाया जाएगा। लेकिन फ़िलहाल सड़क जस की तस है और लोग धूल में चलने को मजबूर हैं।यहाँ विभागों का उदासीन रवैया जनता के लिए दुखदाई होता जा रहा है।जाने कब विभाग कुम्भकर्णी नींद से जागेगा और जनता की सुनेगा और इस मार्ग की हालत सुधरेगी।आज आलम यह है बुजुर्ग नागरिक,छोटे बच्चे और आम जनता धूल से बचने के लिए मास्क पहनने पर मजबूर हो गयी है।इस सड़क में सनी देओल की फिल्म का डायलाग चरितार्थ होता है जब विभाग लगातार डामरीकरण के लिए तारीख पर तारीख देता आ रहा है और जनता इस उम्मीद में है कि ना जाने वो तारीख कब आयेगी।
