अल्मोड़ा-जिलाधिकारी कार्यालय अल्मोड़ा में कलैक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल संवर्ग के सदस्यों द्वारा मुख्य सचिव द्वारा हड़ताल पर रोक एवं वेतन रोकने संबंधी आदेश जारी किए जाने की कड़ी निन्दा की गयी है तथा इस आदेश को निरस्त करने हेतु सभी सदस्यों द्वारा बात कही गई है।इस फैसले को अलोकतांत्रिक रवैया करार दिया गया।इस अवसर पर कलैक्ट्रेट संगठन के जिलाध्यक्ष शशि मोहन पांडेय,जिला मंत्री दीपक तिवारी,सांस्कृतिक मंत्री दीपशिखा मेलकन्या,मनोज कांडपाल, मनोज मासीवाल,रंजीत नाथ,दीपा पांडे,गीता भाकुनी,देवेंद्र बिष्ट,कमलेश अधिकारी,तनुज बिष्ट,जगजीवन सिंह बिष्ट,रिजवान,उमेश पांडे,सोनू कुमार,अजय बिष्ट उपस्थित रहे।धीरेन्द्र कुमार पाठक मंडल अध्यक्ष फैडरेशन व सचिव श्री सौरभ चंद,जिलाध्यक्ष सी एस नैनवाल,जिला मंत्री पुष्कर सिंह भैसोड़ा द्वारा भी इस शासनादेश का विरोध किया गया है।मंडलीय अध्यक्ष धीरेन्द्र कुमार पाठक द्वारा कहा गया है कि सरकार द्वारा अलोकतांत्रिक फैसला लिया गया है जिसका संगठन पुरजोर विरोध करेगा।उन्होंने कहा कि इस शासनादेश की निंदा की जाती है। शासन मांग पत्र पूर्ण करें।उन्होंने कहा कि संगठनों को आंदोलन करने का शौक नहीं है।लोकतांत्रिक व्यवस्था है तो कर्मचारियों की बातों को भी सुनना होगा।ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तराखंड में नादिरशाही रवैया चरम पर है।सरकार को इस नादिरशाही आदेश को वापस लेना चाहिए धरना प्रदर्शन आंदोलन संगठनों का संविधान प्रदत्त अधिकार है।इसे दुनिया की कोई भी ताकत रोक नहीं सकती है।श्री पाठक ने कहा कि इस राज्य के निर्माण के लिए कर्मचारी भी 94 दिन की हड़ताल पर रहे लेकिन कभी सोचा न था कि ऐसे तुगलकी फरमान इस राज्य में कर्मचारियों के लिए लागू होंगे।कार्मिक अपने हितों के पोषण के लिए आंदोलन के लिए स्वतंत्र हैं और उनका अधिकार भी है।उन्होंने कहा कि शासन द्वारा फांसीवादी तरीका अपनाया जा रहा है जो कि अलोकतांत्रिक है।सरकार को इस शासनादेश को वापस लेना होगा और 21 सूत्रीय मांगों पर शासनादेश जारी कर कार्मिकों के हितों का पोषण करना चाहिए।