अल्मोड़ा-उत्तरांचल फैडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन उत्तराखंड कुमाऊं मण्डल के पूर्व अध्यक्ष व एजुकेशनल मिनिस्ट्रीयल आफीसर्स एसोसिएशन कुमाऊं मण्डल नैनीताल के पूर्व मंडल सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक ने फारगो नियमावली विसंगति निराकरण की मांग की है।उन्होंने प्रेस को जारी बयान में कहा कि फारगो नियमावली से प्राकृतिक व मानवाधिकार का हनन हो रहा है इसमें संशोधन किया जाना बहुत जरूरी है।बहुत से कार्मिक पारिवारिक या अन्य कारणो से पदोन्नति में कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाते और पदोन्नति से वंचित हो जाते हैं इसलिए इस नियमावली में संशोधन जरूरी है। सरकार को फारगो नियमावली में हर हाल में संशोधन करना चाहिए पदोन्नति अधिकार है उससे वंचित नहीं कर सकते और उसी भर्ती वर्ष में कनिष्ठ सदस्यों की वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति हो सकती है उन्हें भी एक वर्ष इंतजार नहीं करना पड़ेगा क्योंकि पदोन्नति के रिक्त पदों के सापेक्ष डेढ़ गुना सदस्यों की सी आर मांगी जाती है और जिन सदस्यों द्वारा फारगो किया जाता है उन्हें एक भर्ती वर्ष बाद लिया जाना चाहिए ताकि किसी भी सदस्य के अधिकारों का हनन न हो।धीरेन्द्र कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि हर जनपद में 60 सुगम व 40 प्रतिशत दुर्गम स्थान का निर्धारण हो तो सदस्यों को पदोन्नति में दूर जनपद में भी नहीं जाना पड़ेगा।सरकार को आचार संहिता समाप्त होने के बाद फारगो नियमावली विसंगति का निराकरण व सुगम दुर्गम एक्ट की समीक्षा करने की आवश्यकता है किया जाना जरूरी है।उत्तराखंड में मानवाधिकार व प्राकृतिक न्याय के दृष्टिगत भी कार्य करना जरूरी है। धीरेन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि स्थानांतरण भी अनिवार्य रूप से होने चाहिए और अनिवार्य स्थानांतरण को अनुरोध से पूर्व करना चाहिए।एक्ट में गंभीर विसंगति बनी हुई है उनका निराकरण जरूरी है।

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