अल्मोड़ा-राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन भारत सरकार और राज्य परियोजना प्रबंधन ग्रुप नमामि गंगे द्वारा 15 दिवसीय स्वच्छता पखवाड़ा और दृश्यकला संकाय द्वारा 10 दिवसीय राष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी/ कार्यशाला जल संरक्षण एवं नदियों का पुनरुद्धार (स्वच्छता एवं तटीय सौंदर्य के विशेष परिप्रेक्ष्य में) का उद्घाटन सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के अल्मोड़ा परिसर के दृश्यकला संकाय में सोमवार को हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अल्मोड़ा के मुख्य विकास अधिकारी डा० नवनीत पांडे,विशिष्ट अतिथि के रूप में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति नरेन्द्र सिंह भंडारी,कार्यक्रम अध्यक्ष रूप में परिसर निदेशक प्रोफेसर नीरज तिवारी,नमामि गंगे की विश्वविद्यालय संयोजक डा० ममता असवाल,प्रदर्शनी की संयोजक प्रोफेसर सोनू द्विवेदी आदि अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।इसके उपरांत अतिथियों को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया।दृश्य कला संकाय के नाजिम अली और उनके साथियों ने इजुली दे वरदाना सरस्वती गीतऔर स्वागत गीत के रूप में स्वागत वंदन अभिनंदन है।यहां उपस्थित जो भी जन है,गीत गाकर मंत्रमुग्ध किया।नमामि गंगे की विश्वविद्यालय की संयोजक डा० ममता असवाल ने नमामि गंगे मिशन की विस्तार से रूपरेखा प्रस्तुत की।उन्होंने बताया कि गंगा का प्रदूषण निरन्तर बढ़ रहा है जो चिंतनीय है।इस समस्या को देखते हुए देशव्यापी स्वच्छता पखवाड़ा मनाया जा रहा है।15 मार्च से 31 मार्च तक विविध प्रकार के कार्यक्रम इसके तहत सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में आयोजित किये जायेंगे।दृश्यकला संकाय की संकायाध्यक्ष और प्रदर्शनी की संयोजक प्रोफेसर सोनू द्विवेदी ने कहा कि युवा चित्रकार तुलिका के माध्यम से जल संरक्षण एवं नदियों का पुनरूद्धार विषय पर अपनी भावाभिव्यक्ति चित्र रूप में देंगे।साथ ही आगामी दिनों में भारतीय संस्कृति या अमूल्य धरोहर’ विषय से केंद्रित चित्रों की प्रदर्शनी लगाई जा रही है जो आकर्षण का केंद्र रहेंगी।उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति,भारतीय कला धरोहर एवं लोक से जुड़े हुए विषयों पर दस दिवसीय राष्ट्रीय चित्रकला प्रदर्शनी के माध्यम से इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए एक संदेश जन जन तक जाएगा।मुख्य अतिथि के रूप में डा०नवनीत पांडे ने कहा कि हमें एक बड़े मिशन के तहत काम करना होगा। हमें जलस्तर को बढ़ाने,नदियों को साफ करने,जल-जंगल को बचाने के प्रयास करने होंगे।गंगा के बहाने हमें सभी नदियों को बचाने के लिए आगे आना होगा।हमें नवीन पीढ़ी को साथ लेकर इस तरफ काम करना होगा। उन्होंने नमामि गंगे को महत्वाकांक्षी योजना बताते हुए कहा कि हमें इस मिशन को जन अभियान बनाना होगा। विशिष्ट अतिथि के रूप में कुलपति प्रोफेसर नरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि जल ही जीवन है।गंगा और उसकी सहायक नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए हमें आगे आना होगा।नमामि गंगे मिशन भी इसी सोच का परिणाम है।देश की जनता को जोड़कर यह मिशन संचालित हो रहा है और इसकी शुरुवात की गई है।आज भारत देश में नदियों के पुनरुथान के लिए बहुत गंभीरता से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन की प्रारंभिक शुरुवात नादियों के किनारे हुई है।मानवीय सभ्यता नदी-मुहाने पर विकसित हुई।नदी घाटी में ही जल और पर्यावरण के साथ हमारी सभ्यता फली फूली है।लेकिन विकास की दौड़ में हमने इसके साथ अन्याय किया है। अब प्रकृति का क्रम टूट रहा है और आने वाले समय के लिए बेहद खतरनाक सूचक भी है लेकिन इस प्रकार के राष्ट्रीय मिशन के तहत हम इस समस्याओं को दूर करने के लिए प्रयास कर सकते हैं।उन्होंने आगे कहा कि विकास में हम अपनी प्रकृति से दूर हो रहे हैं।जिससे प्रकृति के तत्त्व हमसे दूर हो रहे हैं।हमें प्रकृति के तत्त्वों की रखवाली करनी होगी।हमें इनको अपना हिस्सा बनाना होगा।अपने आस-पास के सूखे हुए स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए काम करना होगा।हमें जागरुक रहकर कार्य करना होगा।उन्होंने कहा कि ग्रीन कैम्पस क्लीन कैम्पस की मुहीम भी यहां हमने चलाई है।इस मुहीम को गांव गांव ले जाएं।उन्होंने चित्रकला प्रदर्शनी की सराहना की।अध्यक्षता करते हुए परिसर के निदेशक प्रोफेसर नीरज तिवारी ने कहा कि नमामि गंगे के तहत इतना बड़ा कार्यक्रम मिला है।इसके लिए सराहना की जानी चाहिए।जल से ही हमारा जीवन जुड़ा है।गंगा की सफाई के लिए कई प्रयास हो चुके हैं। अभी और इसपर प्रयास हो रहा है। इसी के तहत इसकी सहायक नदियों को भी पुनर्जीवित करना होगा।विश्वविद्यालय के संबंध में उन्होंने कहा कि कुलपति जी के निर्देशन में बेहतर और सराहनीय कार्य हो रहे हैं।विगत छः माह में कुलपति जी के निर्देशन में बड़े निर्णय लिए गए हैं।जिससे विश्वविद्यालय प्रगति पथ पर अग्रसर है।उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाइयाँ दी और कहा कि आप सभी इसी तन्मयता के साथ विश्वविद्यालय का सहयोग करें।डा० ममता असवाल ने नमामि गंगे मिशन से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री दिखाकर नदियों को बचाने के लिए आह्वान किया।इस अवसर पर चित्रकला विभाग के डा० संजीव आर्या ने संचालन किया।उद्घाटन अवसर पर विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय के विशेष कार्याधिकारी डा० देवेंद्र सिंह बिष्ट,कला संकायाध्यक्ष प्रोफेसर पुष्पा अवस्थी,अधिष्ठता छात्र कल्याण प्रोफेसर जया उप्रेती, कुलानुशासक प्रोफेसर अनिल कुमार यादव,प्रोफेसर जीवन सिंह रावत, प्रोफेसर अनिल जोशी,डा०भाष्कर चौधरी,डा० पारुल सक्सेना,डा०ललित चंद्र जोशी,विनीत बिष्ट,कौशल कुमार,रमेश मौर्य,चंदन आर्य,डा० विभाष मिश्रा,जीवन जोशी,पूरन मेहता,संतोष मेर आदि शिक्षक,छात्र और कर्मचारी शामिल हुए।
