अल्मोड़ा-जनपद के चितई गाँव में लगातार बढ़ रही भू-माफिया की गतिविधियों और पहाड़ की जमीन,जंगल,रास्तों एवं ग्राम संसाधनों पर हो रहे अतिक्रमण के विरोध में आज एक महत्वपूर्ण जन बैठक एवं आंदोलन आयोजित किया गया।यह आंदोलन उत्तराखंड जन चेतना मंच के बैनर तले,सामाजिक कार्यकर्ता विनय किरोला के कार्यालय के नेतृत्व में ग्रामीणों द्वारा किया गया।बैठक में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पहाड़ की जमीन केवल जमीन नहीं,बल्कि पहाड़ की अस्मिता, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य है जिसे किसी भी कीमत पर भू-माफिया के हाथों लूटने नहीं दिया जाएगा।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक संरक्षण में कुछ भू-माफिया ग्राम भूमि,रास्तों और सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि यह लड़ाई केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगी,बल्कि आवश्यकता पड़ी तो सड़क से लेकर उच्च न्यायालय तक कानूनी और संवैधानिक लड़ाई लड़ी जाएगी।ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि सभी दस्तावेज, खतौनी,नक्शे और प्रमाण तैयार है और कानूनी कार्यवाही को मजबूत किया जाएगा।बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते भू-माफिया पर लगाम नहीं लगी तो पहाड़ में
ग्रामीणों के परंपरागत रास्ते बंद हो जाएंगे।जल स्रोतों पर खतरा उत्पन्न होगा। पलायन और तेज होगा।आने वाली पीढ़ियों को अपनी जमीन से वंचित होना पड़ेगा।इसलिए यह आंदोलन केवल चितई गाँव तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरे अल्मोड़ा और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में जनचेतना अभियान के रूप में फैलाया जाएगा।इस आंदोलन एवं बैठक में अनेक वरिष्ठ अधिवक्ताओं,सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्राम प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। मुख्य रूप से एडवोकेट विनोद तिवारी,जगदीश जोशी,अभिषेक पंत,प्रकाश चंद्र,नितिन पंत,राजू कांडपाल,बसंत राम सरपंच,संजय पुना,राजेश पुना,शिवराज पुना,बिशन राम सरपंच,राजेन्द्र सिंह बोरा,वीरेंद्र रौतेला,मोहन चंद्र,महेंद्र कुमार,मोहन चंद्र रूवाली,अतुल रूवाली,वीरेंद्र सिंह रौतेला,राजू बोरा,पारस कुमार उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन प्रकाश चंद्र आर्य द्वारा किया गया।ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि भू-माफिया और उनके संरक्षणकर्ताओं के खिलाफ शीघ्र प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा तथा जिला प्रशासन,शासन और न्यायालय तक आवाज़ बुलंद की जाएगी।अंत में सभी ने संकल्प लिया कि पहाड़ की जमीन,जंगल और संसाधनों की रक्षा के लिए एकजुट रहकर लोकतांत्रिक और कानूनी लड़ाई जारी रखी जाएगी।

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