अल्मोड़ा-सरकारी चिकित्सालयों से मरीजों को रेफर करने के मामले लगातार सामने आ रहे थे जिसका मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संज्ञान लेते हुए रेफर मामलों पर चिकित्सालय प्रशासन की जवाबदेही तय करने हेतु एस ओ पी जारी करने के निर्देश दिए हैं जिसका सामाजिक सरोकारों में सक्रिय भाजपा नेता त्रिलोचन जोशी ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया है और कहा है कि मुख्यमंत्री के इस फैसले से जनता को काफी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि लगातार सरकारी चिकित्सालयों एवं खासकर अल्मोड़ा के चिकित्सालयों से मरीजों को रेफर करने के मामले बढ़ रहे थे जिससे मरीज और उनके परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने कहा कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी,उत्तरदायी और मरीज-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पिछले दिवस स्वास्थ्य सचिव डॉ आर राजेश कुमार ने सोमवार को सचिवालय स्थित सभागार में सभी 13 जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और उप-जिला अस्पतालों के प्रमुख अधीक्षकों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की जिस पर मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया पर जवाबदेही तय करने के साथ ही हर रेफरल पर ठोस कारण देने की बात कही है।श्री जोशी ने कहा कि स्वास्थ्य सचिव ने रैफरल प्रणाली को लेकर खासतौर पर नाराजगी जताई और इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब अस्पतालों से मरीजों को अनावश्यक रूप से रेफर नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई बार देखा गया है कि अस्पतालों की लापरवाही या संसाधन प्रबंधन की कमी के कारण मरीजों को बिना किसी स्पष्ट कारण के रेफर कर दिया जाता है,जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है।उन्होंने निर्देश दिए कि हर रेफरल की जिम्मेदारी संबंधित सीएम एस पर होगी। हर रेफरल को सी एम एस की काउंटर-साइनिंग के साथ वैध और ठोस कारणों से ही किया जाना अनिवार्य होगा। यदि किसी केस में यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई या कारण अपर्याप्त पाया गया तो उस अधिकारी के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्वास्थ्य महानिदेशक को निर्देशित किया कि रैफरल से संबंधित एक स्पष्ट एस ओ पी तैयार की जाए, ताकि पूरे प्रदेश में एकरूपता के साथ रेफरल की प्रक्रिया अपनाई जा सके। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की जनता का दर्द समझा है और मुख्यमंत्री की इस पहल से निश्चित रूप से प्रदेश सहित पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार आयेगा।
