अल्मोड़ा-आज देर शाम कांग्रेस जिला महामंत्री ने समीक्षा बैठक में भाजपा जिलाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों के बैठने पर अपने बयान के माध्यम से आपत्ति दर्ज की थी। उनका कहना था कि समीक्षा बैठक में भाजपा जिलाध्यक्ष का बैठना अलोकतांत्रिक है। मीडिया में बयान आने के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि वह भाजपा जिलाध्यक्ष के साथ जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि भी हैं। उन्होंने कहा कि जनता ने जिस विश्वास के साथ उन्हें जिला पंचायत सदस्य के पद पर चुना है उन्हें उस पद का भी जिम्मेदारी से निर्वहन करना है। समीक्षा बैठक में एक जनप्रतिनिधि के नाते क्षेत्र की जनता की समस्याओं को पटल पर रखना और उनका समाधान करवाना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है।उन्होंने प्रशासनिक समीक्षा बैठकों को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह भ्रामक,तथ्यहीन एवं राजनीतिक हताशा से प्रेरित बताया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी जनप्रतिनिधि का प्रशासनिक या समीक्षा बैठक में उपस्थित रहना न तो गलत है और न ही असंवैधानिक।यह कोई नई परंपरा नहीं है।पूर्व में कांग्रेस की सरकारों के कार्यकाल में भी उनके जिलाध्यक्ष,मंडल अध्यक्ष एवं अन्य जनप्रतिनिधि इस प्रकार की बैठकों में सम्मिलित होते रहे हैं।कांग्रेस को आरोप लगाने से पूर्व अपने अतीत का अवलोकन अवश्य करना चाहिए।साथ ही कहा कि वे केवल भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष ही नहीं बल्कि सकनियाकोट जिला पंचायत क्षेत्र से दोबारा निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य भी हैं।भारतीय संविधान के अंतर्गत स्थापित पंचायती राज व्यवस्था जनप्रतिनिधियों को शासन एवं प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने का संवैधानिक अधिकार प्रदान करती है।इस नाते एक निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य के रूप में प्रशासनिक बैठकों में बैठना उनका संवैधानिक अधिकार और दायित्व है।उन्होंने कहा कि समीक्षा बैठक में उपस्थित अधिकांश लोग ग्राम प्रधान,क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों से जनता द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि थे। एक सजग और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि का कर्तव्य होता है कि वह अपने क्षेत्र की जनसमस्याओं,विकास कार्यों की प्रगति एवं कमियों को सक्षम अधिकारियों के समक्ष रखे।यही लोकतंत्र की आत्मा है।यह भी स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधि प्रशासनिक बैठकों में जनता की आवाज़ को प्रशासन तक पहुँचाने का कार्य करते हैं ताकि समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके।यह जनप्रतिनिधियों का लोकतांत्रिक और संवैधानिक कर्तव्य है।उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत कोई भी विधायक या मंत्री अपने प्रतिनिधि के रूप में भी किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों जैसे ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य या जिला पंचायत सदस्य को सरकारी या प्रशासनिक बैठकों में बैठा सकता है।प्रतिनिधि के रूप में उनकी उपस्थिति का उद्देश्य केवल अपने क्षेत्र की जनसमस्याओं, विकास कार्यों और स्थानीय आवश्यकताओं को प्रशासन के समक्ष रखना होता है।यह व्यवस्था लोकतांत्रिक प्रक्रिया, पंचायती राज प्रणाली एवं प्रशासनिक परंपराओं के पूर्णतः अनुरूप है,जिससे शासन में पारदर्शिता,जनभागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।महेश नयाल ने कहा कि आज कांग्रेस के पास कोई जनहित का मुद्दा शेष नहीं बचा है।भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में उत्तराखंड में हो रहे निरंतर विकास कार्यों और सुशासन से घबराकर कांग्रेस निराधार आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी को भी मेरे संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों से कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
जनता की समस्याओं को सक्षम अधिकारियों के समक्ष रखना उनका अधिकार ही नहीं बल्कि कर्तव्य है और वे इसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाएंगे। कहा कि भारतीय जनता पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों,संविधान और प्रशासनिक निष्पक्षता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जनप्रतिनिधि जनता की आवाज़ को मजबूती से आगे भी उठाते रहेंगे।
