अल्मोड़ा-हिन्दू नव वर्ष के पहले महीने अर्थात चेत्र मास में मनाया जाने वाला फूलदेई का त्योहार प्रकृति को धन्यवाद करने के लिए मनाया जाता है।यह महीना बसंत ऋतु के आगमन का महीना होता है इसलिए प्रकृति में चारो ओर हरियाली छा जाती है।सरसों के फूल खिलने लगते है,पेड़ो पर पुनः छोटी छोटी कोपले आने लगती है।यह त्योहार चैत्र मास के पहले दिन यानी संक्रांति को मनाया जाता है।चैत्र मास की संक्रांति से इस पर्व का आरंभ हो जाता है।यह त्योहार मुख्यतः बच्चों का होता है।फूल समान कोमल कोमल बच्चे सारे साल भर इस त्योहार का इंतजार करते है ।अल्मोड़ा में भी फूलदेई का त्यौहार सभी ने हर्षोल्लास के साथ मनाया।छोटे छोटे बच्चे हाथ में गुड़ और चावल की थाली लेकर इस पर्व को मनाते नजर आये।फूलदेई के त्यौहार में लोकगीत फूलेदई छम्मा देई दैणी द्वार भरी भकार ये देली स बारंबार नमस्कार पूजैं द्वार बारंबार फूले द्वार जिसका तात्पर्य है कि आपकी देहरी (दहलीज) फूलों से भरी और सबकी रक्षा करने वाली (क्षमाशील) हो,घर व समय सफल रहे,भंडार भरे रहें,इस देहरी को बार-बार नमस्कार,द्वार खूब फूले-फले को गया जाता है।