अल्मोड़ा-एजुकेशनल मिनिस्ट्रीयल आफीसर्स एसोसिएशन कुमाऊं मण्डल नैनीताल ने डी जी वंशीधर तिवारी के उस आदेश पर पुनर्विचार का अनुरोध किया गया है जिसमें उनके द्वारा विभागीय उच्चाधिकारियों से मिलने के लिए नीचे के अधिकारियों से अनुमति लेने की बात कही गई है और मेल से अनुरोध पत्र भेजने को कहा गया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह बात व्यवहारिक नहीं है।जनता व अधिकारियों से मिलने का समय निश्चित होता है और कोई भी कार्मिक समस्या के निस्तारण के लिए अपनी बात रख सकता है।बहुत से मामलों में मार्गदर्शन व विधि परामर्श ही होता है जो कि विभागाध्यक्ष स्तर से ही संभव है।कोई भी अधिकारी दूसरे किसी अधिकारी की उपलब्धता को सुनिश्चित नहीं कर सकता है तो मिलने की अनुमति कैसे देगा।ये सब व्यवहारिक नहीं है।जिन मामलों में कोई कार्मिक अपनी समस्या के समाधान के लिए अधिकारियों से अपनी बात रखना चाहता है तो उसे रोकना नहीं चाहिए।यह लोकतंत्र में उचित नहीं है।शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा मिलने की अनुमति व एक दिन पूर्व मेल से भेजने की प्रक्रिया को स्थगित करना चाहिए और किसी भी कार्य दिवस को मिलने की अनुमति प्रदान करनी चाहिए।कुमाऊं मण्डल सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक द्वारा वर्तमान फैसले को अव्यवहारिक बताया और उम्मीद व्यक्त की है कि विभाग के अधिकारियों द्वारा अपने फैसले पर पुनर्विचार किया जायेगा।
