कपकोट-आज जारी एक बयान में वरिष्ठ समाजसेवी गंगा सिंह बसेड़ा ने कहा कि कपकोट तहसील का गठन 12 सितंबर 1997 में हुआ था और वर्तमान समय में इसके अंतर्गत 260 से अधिक गांव आते हैं।जिनकी लगभग एक लाख के आसपास आबादी है कपकोट तहसील मुख्यालय में एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट है जिस पर लगभग सभी गांव निर्भर रहते हैं किंतु यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है और इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।जैसे ही जैसे ही चुनाव आते हैं प्रत्येक दल के जनप्रतिनिधियों का कपकोट अस्पताल मुख्य विषय बन जाता है और इस अस्पताल को लेकर तरह -तरह की घोषणाएं की जाती हैं लेकिन चुनाव संपन्न होने के पश्चात वह सारी घोषणाएं अधूरी रहने की जैसे एक परंपरा बनकर रह गई है।उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोरोनावायरस ने पूरे देश में अपने पांव पसार दिए हैं उससे अछूता कपकोट तहसील भी नहीं रहा है इसके अंतर्गत भी कोरोना महामारी अपने प्रचंड स्थिति पर पहुंच गई है और गांव के गांव इस महामारी की चपेट में आ गए हैं किंतु स्वास्थ्य संबंधी जांच ना होने और अव्यवस्थाओं के कारण लोग हॉस्पिटल आने और अपने को चेक कराने के बजाय घर में रहकर स्वयं उसका उपचार करने को बेहतर मान रहे हैं।जिससे यह महामारी और अधिक फैलने की संभावना बनी हुई है।श्री बसेड़ा ने कहा कि वर्तमान समय में कपकोट हॉस्पिटल में 30 बेड के सापेक्ष केवल 10 बेड हैं इसके साथ ही हॉस्पिटल विशेषज्ञ चिकित्सकों तथा कर्मचारियों के कमी से जूझ रहा है।हॉस्पिटल में मशीनें होने के बावजूद तकनीशियनों की कमी होने से मशीनें संचालित नहीं हो रही है और वह केवल धूल फांक रही हैं।अल्ट्रासाउंड भी हप्ते में एक दिन होता है मंगलवार को वर्तमान समय में कोरोना के कारण लोग हॉस्पिटल आने से डर रहे हैं।कपकोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फिजिशियन,सर्जन,हड्डी रोग विशेषज्ञ,बाल रोग विशेषज्ञ,महिला रोग विशेषज्ञ,एक्स-रे टेक्नीशियन,लैब टेक्नीशियन,कनिष्ठ सहायक आदि जैसे महत्वपूर्ण पद भी खाली हैं और कुछ पद भरे भी हैं तो वह संविदा के रूप में भरे जा रहे हैं और जल्द ही उनका कार्यकाल भी समाप्त होने वाला है।जिसके कारण यह अस्पताल केवल रेफर सेंटर और टीका लगाने का सेंटर बनकर रह गया है,सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की अव्यवस्था का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकताहै कि लोग प्राइवेट क्लिनिक से दवाई खरीद कर इलाज चलाते हैं मगर अस्पताल में आने से डरते हैं।बताते चलें कि कपकोट का सुपी,मल्ला देश कंटेनमेंट जोन बने हुए हैं।इसके अलावा बेड़ा-मझेड़ा,जगथाना, नान,कन्यालीकोट, बैसानी,बदियाकोट, किलपरा,बघर,तोली, आदि बहुत सारे ऐसे गांव हैं जो बुखार की चपेट में है और टेस्ट होने के ना होने के कारण उन्हें बीमारी का भान नहीं है।हालांकि कपकोट महाविद्यालय में बेड की व्यवस्था कोरोना को देखते हुए की गई है किंतु वह भी संचालित नहीं हो पाई है।उन्होंने कहा कि ऐसे समय में सरकार को चाहिए कि गांव गांव में टीकाकरण अभियान चलाये, क्योंकि लोगों को टीका लगाने के लिए 20 से 25 किलोमीटर की दूरी तय करने के आना पड़ रहा है जिससे संक्रमण का खतरा तो बड़ ही रहा है साथ ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों पर दोहरी मार भी पड़ रहा है।इस कठिन समय में सभी जनप्रतिनिधियों को अपने स्वार्थ को ना देखते हुए जनता के हित की बात करनी चाहिए और कपकोट अस्पताल को एक सुसज्जित सुव्यवस्थित और सुविधा युक्त हॉस्पिटल बनाने में अपना योगदान देना चाहिए।
