बागेश्वर-बागेश्वर के समाजसेवी गंगा सिंह बसेड़ा ने आज प्रैस को जारी बयान में कहा कि प्राथमिक शिक्षकों की प्रदेश में 2018-19 में बैकलाग के 430 पदों भर्ती प्रक्रिया चल रही है परन्तु खेद इसका है कि यह भर्ती अभी तक पूर्ण नहीं हो पायी है।उन्होंने कहा कि उस वक्त इस भर्ती को टीईटी मेरिट के आधार पर करने का निर्णय लिया गया था लेकिन अभी तक इसका रिजल्ट जारी नहीं हुआ है।बिना रिजल्ट जारी किए ही नई भर्ती प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया जो कि प्राथमिक शिक्षकों के 2600 पदों पर निकली वो भी लटकी पड़ी है और बाद में निकली इस भर्ती प्रक्रिया को वर्ष वार करने का निर्णय लिया गया था वह भी अभी अधर में ही लटका पड़ा है।श्री बसेड़ा ने कहा कि इससे पूर्व प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती वर्ष वार होने के कारण जिला स्तर पर होती थी किंतु इस बार सरकार ने इन नियमों में फेरबदल करते हुए यह निर्णय लिया कि उत्तराखंड में कोई भी व्यक्ति किसी भी जिले से आवेदन कर सकता है और हर जिले के लिए अलग से आवेदन करना होगा जिस कारण से आवेदन पत्रों की भीड़ जमा हो गयी।एक ही अभ्यर्थी ने 9-10 जिलों से फार्म डाले हुए हैं।आखिर तकनीकी के इस युग में हम कब तक ऐसे भटकते रहेंगे?उन्होंने कहा कि आगामी भर्ती या तो जिला स्तर पर होनी चाहिए।अगर जिला स्तर पर नहीं होनी है तो राज्य स्तर पर भर्ती हो और इसके लिए एक ही आवेदन किया जाये जिससे प्रशिक्षित बेरोजगारों के समय व धन की बचत हो।उन्होंने कहा कि सरकार कम बच्चों वाले प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने पर तुली हुई है लेकिन आखिर विद्यालय बंद क्यों हो रहे हैं इसकी जड़ तक कोई जाना नहीं चाहता है।किसी भी प्राथमिक विद्यालय में 2 या 3 शिक्षक होते हैं जिसमें से उन्हें विभागीय डाक संबंधी कार्य,मध्यान्ह भोजन संबंधी कार्य जैसे कार्यों को संपन्न करना होता है जिस कारण विद्यालय के बच्चों को पर्याप्त समय देने में असमर्थ रहते हैं।एक समय पर पहली कक्षा से लेकर पांचवी कक्षा तक के 5 कक्षा हैं अगर विद्यालय में हैं 2 या 3 शिक्षक भी होते हैं तब भी एक समय पर कम से कम 2 या 3 कक्षा खाली रहती है जिस कारण बच्चे अपेक्षाकृत पढ़ाई में कमजोर होते हैं।इसके अलावा प्राथमिक विद्यालयों में विषयानुसार भी शिक्षकों का चयन ना होने के कारण बच्चे अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषय में पिछड़े रहते हैं।कुछ सरकारी विद्यालय जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं जिस कारण से बच्चों के लिए खतरा बना हुआ।इन सब कारणों को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी विद्यालय में पढ़ाने से कतराते हैं तथा वह प्राइवेट विद्यालयों का सहारा लेना शुरू करते हैं।उन्होंने कहा कि सरकार को सर्वप्रथम विद्यालयों को योग्य शिक्षक प्रदान किए जाएं तथा कम से कम विद्यालय में पांच कक्षाओं हेतु 5 शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।प्रत्येक शिक्षक को विषय के अनुसार चयनित किया जाना चाहिए इससे जरूर सरकारी विद्यालयों की दशा में सुधार आएगा।उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से हम देख रहे हैं कि नियमावली में समय-समय पर सरकार के द्वारा परिवर्तन किया जा रहा है और उस नियमावली से जो संतुष्ट नहीं हैं वह व्यक्ति कोर्ट जाकर स्टे आर्डर ले आते हैं और भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी जाती है।सरकार को चाहिए कि एक ठोस नियमावली लाए जो कि स्थाई हो और हर साल कैलेंडर के हिसाब से भर्ती निकाली जाए।उन्होंने कहा कि आज जिस हिसाब से प्रशिक्षित बेरोजगारों की फौज तैयार हो रही है उसको देखते हुए सरकार ने लटकी हुई भर्ती प्रक्रिया को जल्दी से जल्दी करवाने का निर्णय लेना चाहिए अन्यथा यह भर्ती प्रक्रिया ऐसे ही लटकती रहेगी।
