दिल्ली-उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने आज दिल्ली स्थित उत्तराखंड के आवासीय आयुक्त के कार्यालय के बाहर दिल्ली एनसीआर के स्थानीय नागरिकों द्वारा उत्तराखंड भू कानून संघर्ष समिति दिल्ली एनसीआर के झंडे तले उत्तराखंड में तत्काल सख्त कानून लागू किए जाने की मांग को लेकर आयोजित सत्याग्रह में भाग लिया और सरकार को चेतावनी दी यदि सरकार ने जल्द ही इस बाबत उचित फैसला ना लिया तो उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी राज्य भर में आंदोलन करने को मजबूर होंगे।उन्होंने इस मौके पर दिल्ली एनसीआर वासियों की चिंता को वाजिब बताते हुए कहा कि दरअसल 9 नवंबर सन 2000 को जब राज्य बना था तभी नया भू कानून उत्तराखंड की सरकार को लागू कर देना चाहिए था।उन्होंने स्वीकार किया कि कांग्रेस भी इस मामले में जल्द फैसला ना ले सकी।लेकिन उन्होंने कहा कि अब हरीश रावत,गणेश गोदियाल और प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने मजबूत फैसला लिया है।जैसे ही कांग्रेस की सरकार सन 22 ,फरवरी में राज्य में आएगी सबसे पहले उत्तराखंड में तत्काल लागू किया जाएगा।उन्होंने इस मौके पर 2 अक्टूबर 1994 को हुए मुजफ्फरनगर हत्याकांड की बरसी के अवसर पर इस कांड की जांच की मांग करते हुए सरकार से मांग की कि तत्काल एक नया जांच आयोग मुजफ्फरनगर कांड को लेकर गठित करें।उन्होंने भाजपा सरकार द्वारा पिछले साड़े चार साल में मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को सजा दिलाने के लिए कोई कार्रवाई न किए जाने को दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।इस मौके पर धरने के संयोजको अनिल पंत,प्रेमा धोनी,दीपिका नयाल,कुशाल जीना,प्रताप थलवाल,आशा भराड़ा आदि नेताओं ने उत्तराखंड सरकार से मांग की कि तत्काल कानून लागू करें क्योंकि यदि ऐसा नहीं होता तो राज्य की जमीनों की जो लूट देशभर के भू माफियाओ द्वारा और पूंजीपतियों द्वारा की जा रही है उससे पृथक राज्य के निर्माण का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा और एक दिन उत्तराखंड के असली निवासी वहां पर बाहरी लोगों के नौकर चाकर बन कर रह जाएंगे।इस मौके पर स्थानीय आवासीय आयुक्त को आंदोलन के नेताओं रजनी ढोडियाल, जगत बिष्ट,आशा भराड़ा,दीपिका नयाल,प्रेमा धोनी,अनिल पंत,एसके जैन,शशी मोहन के द्वारा एक ज्ञापन भी दिया गया।इस मौके पर अन्य लोगों के अलावा शिव सिंह रावत,प्रमुख पत्रकार देव सिंह रावत,सत्येंद्र रावत, सुनील कुमार समेत अनेक लोग मौजूद थे।
