










अल्मोड़ा-सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में आयोजित अल्मोड़ा लिटरेचर फेस्टिवल 2026 के दूसरे दिन संगीत, साहित्य और विचारों का अनूठा संगम देखने को मिला। दिनभर आयोजित विभिन्न सत्रों में शास्त्रीय संगीत की सुरमयी प्रस्तुतियों, भावपूर्ण कथावाचन और महाकवि कालिदास के साहित्य पर केंद्रित परिचर्चा ने श्रोताओं को आकर्षित किया। दूसरे दिन की शुरुआत शास्त्रीय गायक हिमांशु दरमोड़ा की गायन प्रस्तुति से हुई। उन्होंने विभिन्न रागों के संयोजन और अपनी सुरीली आवाज से उपस्थित कलाप्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने महोत्सव परिसर में संगीतमय और आध्यात्मिक वातावरण बना दिया। इसके बाद जानी-मानी कथावाचक हीना आलम ने अपनी विशिष्ट शैली में एक भावपूर्ण कहानी प्रस्तुत की। उनके जीवंत कथावाचन ने श्रोताओं को कहानी के पात्रों और उनकी संवेदनाओं से जोड़ दिया। प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। महोत्सव के पहले पैनल डिस्कशन में सुप्रसिद्ध लेखक युगल जोशी की हाल ही में प्रकाशित पुस्तक ‘कहो कालिदास’ पर चर्चा की गई। इसमें प्रख्यात विदुषी दीवा भट्ट और दीपा गुप्ता ने वक्ता के रूप में प्रतिभाग किया। परिचर्चा में वक्ताओं ने महाकवि कालिदास के साहित्य और उनकी कालजयी रचनाओं के समकालीन संदर्भों पर विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि लेखक युगल जोशी ने कालिदास के साहित्य का गहन अध्ययन कर उनकी प्राचीन रचनाओं को वर्तमान संदर्भों में सरल और सुग्राही हिंदी में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक नई पीढ़ी को भारतीय साहित्यिक परंपरा और गौरवशाली अतीत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सत्र के अंत में दर्शकों और विशेषज्ञों के बीच संवाद भी हुआ। इस दौरान साहित्य और कालिदास की रचनाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए गए। दूसरे दिन के आयोजनों ने अल्मोड़ा लिटरेचर फेस्टिवल को साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनाने में अहम भूमिका निभाई।
