






अल्मोड़ा-कर्नाटक खोला रामलीला कमेटी की ओर से आगामी रामलीला मंचन की तैयारियों को लेकर तालीम का दौर लगातार जारी है। तालीम में रामलीला के विभिन्न पात्रों को संवाद अदायगी, अभिनय, भाव-भंगिमा, मंच संचालन और पात्रों के अनुरूप अभिनय की बारीकियों का अभ्यास कराया जा रहा है। बाल कलाकारों से लेकर युवाओं तक में रामलीला को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। कलाकार पूरे मनोयोग और समर्पण के साथ अपने-अपने पात्रों को जीवंत करने की तैयारी में जुटे हैं।कर्नाटक खोला रामलीला कमेटी की खास पहचान यह है कि यहां रामलीला को केवल धार्मिक आयोजन के तौर पर नहीं, बल्कि कला, संस्कृति, संस्कार और युवा प्रतिभाओं को मंच देने वाले महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जाता है। तालीम के दौरान अनुभवी कलाकार नई पीढ़ी को अभिनय की बारीकियां सिखा रहे हैं। कलाकारों को केवल संवाद याद कराने के बजाय पात्र की भावनाओं को समझकर उसी के अनुरूप अभिनय करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अभ्यास के दौरान रामलीला के विभिन्न प्रसंगों की प्रभावी झलक भी देखने को मिल रही है।कमेटी के संस्थापक एवं संयोजक बिट्टू कर्नाटक ने युवाओं, बालकों और विशेष रूप से बालिकाओं से अपील की है कि जिनके भीतर अभिनय की चाह है, जो मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते हैं या जिन्हें लगता है कि उनके अंदर कोई कलात्मक हुनर है, वे रामलीला कमेटी से जुड़ें और तालीम में पहुंचकर अपनी प्रतिभा को सामने लाएं। उन्होंने कहा कि रामलीला का मंच केवल संवाद बोलने का मंच नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास बढ़ाने, अपनी संस्कृति से जुड़ने और अपनी कला को समाज के सामने रखने का अवसर भी है।बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि कई बार प्रतिभा किसी व्यक्ति के भीतर होती है, लेकिन उसे सामने आने के लिए उचित मंच की आवश्यकता होती है। कर्नाटक खोला रामलीला कमेटी का प्रयास है कि ऐसे प्रतिभावान बच्चों और युवाओं को मंच उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे या युवा को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह मंच पर अभिनय कर पाएगा या नहीं। प्रतिभा को अवसर मिलने पर ही वह निखरती है।उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी आधुनिकता और तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अपनी लोक संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ना भी बेहद जरूरी है। रामलीला इसी परंपरा को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करती है। रामलीला के माध्यम से बच्चों को भगवान श्रीराम के आदर्श, मर्यादा, सत्य, त्याग और कर्तव्य जैसे मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है। वहीं अभिनय के माध्यम से उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास, संवाद कौशल और टीम भावना का भी विकास होता है।अल्मोड़ा की सांस्कृतिक पहचान में रामलीला का विशेष स्थान रहा है। यहां की रामलीला वर्षों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है, जिसमें संगीत, संवाद, अभिनय और धार्मिक प्रसंगों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। कर्नाटक खोला रामलीला कमेटी भी इसी समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी के साथ जोड़ते हुए आगे बढ़ाने के प्रयास में जुटी है।कमेटी का प्रयास है कि रामलीला की गरिमा और पारंपरिक स्वरूप को बरकरार रखते हुए नई पीढ़ी की ऊर्जा और प्रतिभा को भी मंच पर स्थान दिया जाए। तालीम के दौरान कलाकार जिस मेहनत और उत्साह के साथ अभ्यास कर रहे हैं, उससे इस वर्ष भी शानदार और प्रभावशाली रामलीला मंचन की उम्मीद जगी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि कर्नाटक खोला रामलीला कमेटी की तैयारियों से क्षेत्र में रामलीला को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है। तालीम में कलाकारों की मेहनत इस बात का संकेत है कि मंच पर अभिनय, संवाद, संगीत और भावनात्मक प्रस्तुति का सुंदर संगम देखने को मिलेगा। कमेटी का यह प्रयास धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ ही स्थानीय बाल एवं युवा प्रतिभाओं को अपनी कला दिखाने का बेहतर अवसर भी प्रदान कर रहा है। अब रामलीला के मंच पर नई प्रतिभाएं अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने को तैयार हैं।
