अल्मोड़ा-सोबन सिंह जीना राजकीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (एसएसजे) अल्मोड़ा के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर के फॉरेंसिक चिकित्सा एवं विष विज्ञान सम्मेलन PAFMAT Conference-2026 का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन में देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञों,शिक्षकों,शोधार्थियों एवं फॉरेंसिक विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों ने सहभागिता कर नवीन शोध एवं समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श किया।कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के प्राचार्य एवं अधिष्ठाता तथा आयोजन अध्यक्ष डॉ. सी.पी. भैसोरा के मार्गदर्शन में किया गया।सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. प्रीत इंदर सिंह एवं संयुक्त आयोजन सचिव डॉ. एल्विन अब्राहम वर्गीज़ ने कार्यक्रम के सफल संचालन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।सम्मेलन में फॉरेंसिक मेडिसिन,विष विज्ञान, मेडिको-लीगल चुनौतियों, न्यायिक प्रक्रियाओं में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका तथा आधुनिक अनुसंधान से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। प्रतिभागियों ने मौखिक एवं पोस्टर शोध प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने शोध कार्यों को साझा किया। इस दौरान नवीन वैज्ञानिक प्रगति, अनुसंधान नवाचारों एवं चिकित्सा शिक्षा के समकालीन विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
विशेषज्ञ वक्ताओं ने फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान, ज्ञान-विनिमय एवं संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रतिभागियों ने सम्मेलन को ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताते हुए इसकी सराहना की।सम्मेलन में आदेश मेडिकल कॉलेज,हरियाणा के फॉरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. डी.एस. भुल्लर ने पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत फॉरेंसिक चिकित्सा की बदलती भूमिका पर प्रकाश डाला।जीएमसीएच, चंडीगढ़ के डॉ. दसारी हरिश ने मेडिको-लीगल रिपोर्टों में होने वाली सामान्य दस्तावेजी त्रुटियों एवं उनके प्रभावों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।एम.आर.ए. मेडिकल कॉलेज, अंबेडकर नगर के प्राचार्य डॉ. मुकेश यादव ने चिकित्सकीय लापरवाही से संबंधित मृत्यु मामलों के प्रबंधन पर व्याख्यान दिया, जबकि एम्स बठिंडा के डॉ. अजय कुमार ने मृत्यु प्रमाण-पत्र एवं ‘ब्रॉट-इन-डेड’ मामलों में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की। एस.आर.एम.एस. बरेली के डॉ. जसविंदर सिंह ने फॉरेंसिक मेडिसिन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इमेजिंग एवं विधिक प्रक्रियाओं के भविष्य पर अपने विचार रखे।संस्थान के पैथोलॉजी विभाग के डॉ. अंकित कौशिक ने हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्टों के मेडिको-लीगल महत्व पर प्रकाश डाला।वहीं क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, रुद्रपुर के वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. भूपेन्द्र सिंह ने यौन उत्पीड़न मामलों में जैविक नमूनों के संग्रहण, संरक्षण एवं विश्लेषण की वैज्ञानिक प्रक्रिया की जानकारी दी।माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. माविल्ला अनुराधा ने प्रयोगशाला चिकित्सा में चिकित्सकीय एवं विधिक उत्तरदायित्वों पर प्रभावी व्याख्यान प्रस्तुत किया।सम्मेलन में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों के चिकित्सा महाविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों एवं फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं से आए प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता की। संकाय सदस्यों, वरिष्ठ चिकित्सकों, शोधार्थियों एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों की बड़ी उपस्थिति ने सम्मेलन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।कार्यक्रम के समापन पर आयोजन समिति द्वारा सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया गया तथा भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक आयोजनों के माध्यम से चिकित्सा एवं फॉरेंसिक शिक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने का संकल्प लिया गया।

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