अल्मोड़ा-भारतीय जनता पार्टी ने संसद में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम और अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है।पार्टी ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी,तृणमूल कांग्रेस और डीएमके पर महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ खड़े होने तथा देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है।भाजपा के अनुसार 16 और 17 अप्रैल को संसद में संविधान (संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा देश के लोकतांत्रिक भविष्य और महिलाओं की भागीदारी से जुड़ा एक ऐतिहासिक अवसर था। पार्टी का कहना है कि विपक्ष ने इस अवसर पर रचनात्मक सहयोग देने के बजाय महिला-विरोधी मानसिकता का परिचय दिया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए भाजपा ने कहा कि महिलाओं को नीति-निर्माण में भागीदारी देना कोई उपकार नहीं,बल्कि उनका संवैधानिक और स्वाभाविक अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले चुनावों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और सशक्त मतदान इन मुद्दों पर निर्णायक प्रभाव डालेगा।भाजपा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल वर्षों से महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व से वंचित करते रहे हैं जो हालिया बहस में एक बार फिर उजागर हुआ। पार्टी ने विपक्ष के रवैये को अलोकतांत्रिक,शर्मनाक और महिला-विरोधी बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार,इन विधेयकों का उद्देश्य एक व्यक्ति,एक वोट,एक मूल्य के संवैधानिक सिद्धांत को प्रभावी रूप से लागू करना है। उन्होंने परिसीमन को एक आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इसे लंबे समय तक टालने से प्रतिनिधित्व में असंतुलन उत्पन्न हुआ है।भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने दशकों तक तकनीकी बहानों,समितियों और लंबी प्रक्रियाओं के जरिए महिला आरक्षण को टालने का काम किया।पार्टी का दावा है कि पंचायत स्तर पर आरक्षण देना आसान समझा गया,लेकिन संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयासों को जानबूझकर लंबित रखा गया।अन्य विपक्षी दलों पर भी भाजपा ने तीखे आरोप लगाए। समाजवादी पार्टी पर धर्म आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाने का आरोप लगाया गया जबकि तृणमूल कांग्रेस पर पश्चिम बंगाल में महिलाओं की आवाज को दबाने का आरोप लगाया गया।वहीं डीएमके और उसके सहयोगियों पर उत्तर-दक्षिण विभाजन की राजनीति करने की बात कही गई।परिसीमन को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि इससे किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं होगा।उन्होंने कहा कि परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या के अनुपात में संतुलित और समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। भाजपा का यह भी कहना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन परिसीमन से जुड़ा है,इसलिए इसमें देरी का अर्थ महिलाओं के आरक्षण में देरी करना होगा।भाजपा ने महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि देश की महिलाएं अब केवल मूक दर्शक नहीं,बल्कि सक्रिय भागीदार हैं।पार्टी के अनुसार आने वाले समय में महिलाएं अपने मताधिकार के माध्यम से ऐसे मुद्दों पर स्पष्ट और निर्णायक भूमिका निभाएंगी।प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से मेयर अजय वर्मा, भाजपा महिला मोर्चा उपाध्यक्ष किरण पंत, भाजपा नगर अध्यक्ष विनीत बिष्ट,कमला तिवारी, जिला महामंत्री प्रकाश भट्ट,राजीव गुरुरानी, मीडिया प्रभारी मनीष जोशी एवं देवेंद्र भट्ट उपस्थित रहे।अंत में मेयर अजय वर्मा ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं बल्कि देश की आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक संकल्प है।पार्टी का मानना है कि इस अवसर को टालना न केवल राजनीतिक भूल होगी बल्कि सामाजिक और लोकतांत्रिक प्रगति को भी बाधित करेगा।
