अल्मोड़ा-पोखरी,मनान अल्मोड़ा के पहाड़ी क्षेत्र से निकलकर योगेश जोशी पुत्र स्व० नवीन जोशी ने भौतिकी विषय में जूनियर रिसर्च फेलोशिप में 142 स्थान प्राप्त कर न केवल अपने परिवार और क्षेत्र बल्कि पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है।सीमित संसाधनों,कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं की कमी के बावजूद योगेश जोशी ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति,अनुशासन और सतत परिश्रम से यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की।उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हाईस्कूल मैगडी,इंटर राजकीय इंटर कॉलेज भगतोला तथा बीएससी और एमएससी अल्मोड़ा परिसर से पूरा किया है।पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा प्राप्त करना आज भी एक चुनौती है। लंबी दूरी,सीमित पुस्तकालय संसाधन,इंटरनेट की समस्या और मार्गदर्शन की कमी जैसी कठिनाइयों के बावजूद योगेश जोशी ने हार नहीं मानी।उन्होंने भौतिकी जैसे जटिल विषय को गहराई से समझते हुए शोध के प्रति रुचि विकसित की और निरंतर अभ्यास के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त की।योगेश जोशी की यह सफलता यह संदेश देती है कि प्रतिभा किसी महानगर या बड़े कोचिंग संस्थान की मोहताज नहीं होती।यदि संकल्प मजबूत हो और लक्ष्य स्पष्ट हो तो पहाड़ों से भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियाँ प्राप्त की जा सकती हैं।उनकी यह उपलब्धि पहाड़ी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और उन्हें उच्च शिक्षा व शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर शिक्षाविदों,समाजसेवियों, विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने हर्ष व्यक्त किया है और इसे पहाड़ों के युवाओं के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।मनान क्षेत्र के डॉ अशोक उप्रेती ने योगेश जोशी को बधाई देते हुए कहा कि योगेश जोशी की जेआरएफ में सफलता अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है।यह उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि पहाड़ों के विद्यार्थी भी कठिन परिस्थितियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। उनकी सफलता से समाज के अन्य विद्यार्थी प्रेरणा लेंगे और उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने योगेश को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी हैं और आशा करता की है कि वे विज्ञान एवं शोध के क्षेत्र में देश का नाम रोशन करेंगे।इसी क्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि महेश नयाल ने कहा की योगेश जोशी की सफलता पहाड़ी समाज के लिए एक संदेश है कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी हों यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता अवश्य मिलती है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगी।पहाड़ों से निकलकर शिखरों तक पहुँचना संभव है। योगेश जोशी इसकी जीवंत मिसाल हैं।

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