अल्मोड़ा-फ्रांस के और्हेल्यैं गैरंपों और अल्मोड़ा की श्रीपूर्णा वीरवार को वैदिक परंपरा से प्रणय सूत्र में बंधे।विदेशी बारातियों ने कुमाऊनी रीति रिवाज से हुई शादी का खूब आनंद उठाया।दूल्हे और्हेल्यैं ने कहा यूरोप में मैरिज डेस्टिनेशन की कमी नहीं है लेकिन भारतीय संस्कृति वेशभूषा और आध्यात्मिक शांति से प्रभावित होकर ही उन्होंने अल्मोड़ा को चुना।वीरवार को और्हेल्यैं और श्रीपूर्णा का सनातन परंपरा से विवाह हुआ।दूल्हा पक्ष ने हल्दी मेहंदी की रस्म से लेकर गणेश पूजा आदि अनुष्ठान करवाए। ढोल दमाऊ और छोलिया नृत्य दल के साथ बारात निकली। वर पक्ष के साथ फ्रांस से पहुंचे दो दर्जन से अधिक महिला और पुरुष बारातियों ने खूब नृत्य किया। विदेशी महिलाएं रंग वाली पिछवाड़ा, साड़ी और घाघरा चोली में तो पुरुष मेहमान कुर्ता पजामा और शेरवानी में सजे थे। धूलि अर्घ्य, कन्या दान, फेरे,जयमाल आदि रस्मों में दूल्हा और मेहमान काफी रोमांचित और सहज नजर आए। दूल्हा बने और्हेल्यैं ने कहा वह इससे पहले भी कई बार भारत आए हैं। कहा यूरोप में काफी आकर्षक मैरिज डेस्टिनेशन हैं, लेकिन वहां भारतीय संस्कृति की विविधता, आध्यात्मिक शांति और भारतीय शादियों की तरह रोमांच नहीं है। भारत में विशेष कर उत्तराखंड में आकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। कहा मेरे और परिवार, उनके साथ आए मेहमानों के लिए यह शादी पारिवारिक समारोह के साथ आध्यात्मिक शांति यात्रा है।

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