अल्मोड़ा-आगामी दिनों में वनाग्नि की संभावनाओं के दृष्टिगत जिलाधिकारी अंशुल सिंह की अध्यक्षता में जनपद स्तर पर वनाग्नि रोकथाम एवं नियंत्रण को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक जिलाधिकारी कैंप कार्यालय में आयोजित की गई।बैठक में वन विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। बैठक में जिलाधिकारी ने वनाग्नि से निपटने हेतु तैयारियों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए।बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि जनपद अल्मोड़ा में प्रत्येक वर्ष 15 फरवरी से 15 जून की अवधि को वनाग्नि की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।इस अवधि के दौरान वन क्षेत्रों में आग की घटनाओं को रोकने हेतु सभी विभागों को सतर्क एवं समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।जिलाधिकारी ने वन विभाग को फायर लाइन निर्माण, संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी,फायर वॉचर की तैनाती तथा आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान चलाने,ग्राम स्तरीय वनाग्नि प्रबंधन समितियों को सक्रिय करने तथा किसी भी घटना की त्वरित सूचना एवं तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।जिलाधिकारी ने कहा कि वनाग्नि काल से पहले ही प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर लिए जाएं।जिलाधिकारी ने कहा कि अराजक तत्वों के विरुद्ध सख्ती से निपटा जाए। जो भी व्यक्ति या समूह वनाग्नि की घटनाओं में संलिप्त पाया जाए उसके विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वनाग्नि की घटनाओं से पर्यावरण,वन्यजीव एवं जनधन को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी दीपक सिंह,प्रदीप धौलाखंडी,मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी विनीत पाल समेत अन्य संबंधित अधिकारी तथा वर्चुअली सभी उपजिलाधिकारी उपस्थित थे।

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