अल्मोड़ा-भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राजीव गुरुरानी ने देशभर में चल रहे वंदे मातरम अभियान को राष्ट्र की आत्मा का मंत्र बताते हुए कहा कि वंदे मातरम न केवल आज़ादी के आंदोलन का मूल मंत्र रहा है,बल्कि उत्तराखंड ने भी इस राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा आज़ादी के आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय विचारधारा का एक सशक्त केंद्र रहा है। यहां के कवि और स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी स्थानीय भाषा कुमाऊनी में वंदे मातरम को जन-जन की आवाज़ बनाया।अल्मोड़ा के गौर दा ,विक्टर मोहन जोशी,मुंशी हरिप्रसाद टम्टा सहित अनेक देशभक्तों ने कुमाऊनी लोकभाषा में ऐसे गीत रचे जो आज के लोकल फॉर वोकल के विचार को दशकों पहले ही जीवंत कर चुके थे।उन्होंने कुमाऊनी भाषा में रचित वंदे मातरम से जुड़े लोकगीतों का उल्लेख करते हुए कहा छीन न सकनी कभे सरकार वंदे मातरम अर्थात कोई भी सत्ता हमसे वंदे मातरम नहीं छीन सकती।हम गरीबों को छ यो गलहार वंदे मातरम अर्थात वंदे मातरम हम गरीबों के गले का हार है।दुर्जनांन को मन जी भंगार हुछ वीं बखत,कान में जब पुजन छ झंकार वंदे मातरम अर्थात वंदे मातरम की गूंज सुनकर राष्ट्रविरोधी शक्तियों का मन जलकर राख हो जाता है।जेल में चाखा पीषण औ भूख लै मरणा बखत,वी बखत लै यकीणी करिया प्यार वंदे मातरम अर्थात जेल में चक्की पीसते हुए, भूख और यातनाएं सहते हुए भी वंदे मातरम से प्रेम बनाए रखना।
उन्होंने आगे कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने मौत के मुंह में खड़े होकर भी वंदे मातरम का उद्घोष किया मौत का मुख में खड़ा कुंण लागा हत्यार थे ठोकी दे में तलवार वंदे मातरम।अर्थात देश सेवकों ने तलवार गर्दन पर पड़ने से पहले भी वंदे मातरम का जयघोष किया।गुरुरानी ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं,बल्कि त्याग,बलिदान और राष्ट्रप्रेम की जीवंत भावना है,जिसे आज की पीढ़ी तक पहुंचाना हम सबका दायित्व है।भाजपा का यह अभियान इसी राष्ट्रीय चेतना को पुनः जागृत करने का प्रयास है।
