अल्मोड़ा-ऐतिहासिक माँ नंदा देवी मेले के अंतर्गत शनिवार की देर रात एडम्स गर्ल्स इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित स्टार नाइट में सांस्कृतिक रंगारंग प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जनमानस के चहेते गायक प्रकाश काला और सुंदर बाफिला की सुरमयी आवाज़ ने पूरे मैदान में एक अलग ही वातावरण बना दिया।कुमाऊनी लोकधुनों और गीतों की लय पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे।गायक प्रकाश काला और सुंदर बाफिला नेत्रजन्‍य दिव्यांग है।कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध लोकगायिका हेमा ध्यानी की मधुर प्रस्तुति से हुई।उन्होंने कुमाऊनी संस्कृति से जुड़ी अनेक गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को बांध लिया।इसके बाद मंच पर प्रकाश काला और सुंदर बाफिला की जोड़ी आई और उनके लोकप्रिय गीतों ने समां ही बदल दिया।गीतों की झंकार से एडम्स मैदान देर रात तक गूंजता रहा।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में रवि रौतेला,विनीत बिष्ट,धर्मेंद्र बिष्ट और मनोज जोशी मौजूद रहे। अतिथियों ने कलाकारों को सम्मानित किया और कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि नंदा देवी मेला कुमाऊनी संस्कृति की आत्मा है।उन्होंने कहा कि इस मेले में हर वर्ष स्थानीय संस्कृति,कला और परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलता है।मेले की व्यवस्थाओं और आयोजन में इस बार अनेक युवा और समाजसेवी सक्रिय दिखाई दिए।मेला अध्यक्ष मनोज वर्मा, सचिव मनोज सनवाल और मुख्य सांस्कृतिक संयोजक तारा जोशी ने बताया कि इस बार मेले की सांस्कृतिक संध्याओं में खास तौर पर कुमाऊनी लोक कलाकारों को मंच देने का प्रयास किया गया है ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
मेला आयोजन समिति में प्रमुख भूमिका निभाने वालों में सह संयोजक रवि गोयल, व्यवस्थापक अनूप साह, कोषाध्यक्ष हरीश बिष्ट,मुख्य संयोजक अर्जुन बिष्ट चीमा, संयोजक अमित साह मोनू, अमरनाथ नेगी,अमरनाथ सिंह नेगी,पार्षद कुलदीप मेर,सह संयोजक अभिषेक जोशी, मनोज भंडारी ‘मंटू’, धन सिंह मेहता,जीवन नाथ वर्मा,राजेंद्र बिष्ट,व्यवस्थापक हरीश भंडारी, हितेश वर्मा,जगत तिवारी, आशीष बिष्ट,दया कृष्ण परगाई, नमन बिष्ट,पंकज परगाई, आदित्य बिष्ट और गोविन्द मेहरा प्रमुख रूप से शामिल रहे।कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ ने कलाकारों का भरपूर उत्साहवर्धन किया।युवा वर्ग से लेकर बुजुर्गों तक सभी दर्शक लोकगीतों और नृत्यों में खोए नजर आए।मेले में आए श्रद्धालुओं और दर्शकों ने आयोजन समिति की व्यवस्था और प्रस्तुति की सराहना की।एडम्स मैदान में हुई इस सांस्कृतिक संध्या ने यह साबित कर दिया कि नंदा देवी मेला सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि कुमाऊनी संस्कृति और लोकधरोहर को जीवंत रखने का सबसे बड़ा मंच भी है।

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