अल्मोड़ा-उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड जनपद अल्मोड़ा ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि शिक्षा विभाग को अपना खुद का निर्माण निगम बनना चाहिए ताकि विभाग की भी उस पर दखलअंदाजी हो।वर्तमान परिदृश्य में भवन बनने के एक दो वर्ष बाद ही शिकायत की स्थिति है।मासूम बच्चों के हितों के संरक्षण के लिए सरकार को शिक्षा विभाग का पृथक से निर्माण निगम बनाने पर विचार करना चाहिए अन्यथा स्थिति में बदलाव आना संभव नहीं है।डा मनोज कुमार जोशी व सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक ने बताया कि शिक्षा विभाग में भवन बनने पर एक दो वर्ष में ही शिकायत का दौर शुरू हो जाता है।स्पष्ट है कि गुणवत्ता व सही सामग्री के अभाव के कारण ही यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है।कहीं कहीं उल्टी छत पर लोहे की सरिया दिखाई देती है और रंग चूना पेंट की क्वालिटी भी औसत से कम होती है। इससे बच्चों के हितों पर प्रभाव पड़ रहा है आखिर स्पष्ट कब होगा कि नया भवन की मियाद कब तक है। छत टपकना दीवार से पलास्तर गिरना यह बताने के लिए पर्याप्त है कि कार्य संतोषजनक भी नहीं हुआ है।छोटे मोटे मरम्मत कार्य व नाली दीवार निर्माण कार्य भी होते रहते हैं।ऐसे में निर्माण निगम बनने पर स्वत संज्ञान लेते हुए भवनों को सुरक्षित बनाया जा सकता है।वर्तमान में केवल बाहरी तौर पर भवन को सुपुर्दगी की जाती है जिससे गुणवत्ता स्पष्ट नहीं होती है। उत्तराखंड सरकार,शासन व विभाग को इस संबंध में निर्णय लेने की आवश्यकता है।विभाग के अधिकारी भी तकनीकी नहीं होते जिससे वे गलत सही का निर्णय कर सकें। सरकार को गंभीरता दिखाते हुए बुनियादी कारण के दृष्टिगत पृथक से निर्माण निगम बनाया चाहिए ताकि नौनिहालों को सुरक्षा के माहौल में अध्ययन करने की सुविधा मिल सके।
