अल्मोड़ा-नमामि गंगे उत्तराखण्ड और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन,जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आज कुलदेवी ऐड़ी माता मंदिर डोलीडाना परिसर में एक भव्य वैदिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।इस विशेष अवसर पर वेद, पुराण और नदी सभ्यता पर केंद्रित संवाद के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहरों को जनमानस से जोड़ने का प्रयास किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ जिसमें मंदिर के पुजारी राम सिंह पवार,दिन दयाल उपाध्याय कौशल योजना केन्द्र खत्याड़ी के निदेशक रविन्द्र पाण्डे, नीता,भावना नयाल,सुधा वर्मा, लल्लन कुमार सिंह,रॉबिन हिमानी आदि ने संयुक्त रूप से किया।मुख्य अतिथि रविन्द्र पाण्डे ने वेदों को मानवता का मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि वेद विज्ञान,संस्कृति और जीवन मूल्यों की आधारशिला हैं। इनसे जुड़ना हमारी जड़ों से जुड़ना है।विशिष्ट अतिथि भावना नयाल ने पुराणों की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि पुराण हमें धर्म,कर्तव्य और नैतिकता की ओर मार्गदर्शन देते हैं।नीता ने ऋग्वेद की शिक्षाओं को आज के सामाजिक जीवन के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया और कहा कि संगच्छध्वं संवदध्वं जैसे वैदिक सूत्र आज की दुनिया में सामूहिकता की भावना को पुनर्जागृत करने का संदेश देते हैं।सुधावर्मा ने यजुर्वेद और पुराणों के माध्यम से कर्म,दायित्व और समर्पण के मूल्यों पर प्रकाश डाला, जबकि योग शिक्षक लल्लन कुमार सिंह ने पुराणों में निहित नीति और भक्ति के समन्वय को संस्कृति का जीवंत स्रोत बताया।डॉ गिरीश अधिकारी ने वेद-पुराणों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी और कहा कि यह समाज को संतुलित व समरस बना सकता है।योग शिक्षक रजनीश जोशी ने उपनिषदों की गहराई को आत्मबोध का मार्ग बताते हुए अहं ब्रह्मास्मि,तत्त्वमसि जैसे महावाक्यों की व्याख्या की।शोधार्थी रोबिन हिमानी ने वेद और योग के मध्य संबंध स्पष्ट करते हुए बताया कि वेद चेतना का स्रोत हैं और योग उस चेतना की साधना।श्रीमती हेमलता अवस्थी ने वेदों में महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि गार्गी,मैत्रेयी जैसी विदुषियां इस बात का प्रमाण हैं कि वेदकालीन समाज में महिलाएं अत्यंत सशक्त थीं।इस प्रेरणादायी कार्यक्रम का संचालन डॉ गिरीश अधिकारी द्वारा किया गया और अंत में कल्याण मंत्र के साथ इसका समापन हुआ।कार्यक्रम डॉ. नवीन भट्ट विभागाध्यक्ष योग विज्ञान विभाग सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के संरक्षण में आयोजित किया गया जिनका उद्देश्य 21 जून तक उत्तराखण्ड के प्रमुख मंदिरों में ऐसे संवादों का आयोजन कर जनमानस को सनातन ज्ञान से जोड़ना है।इस ऐतिहासिक आयोजन में डोली डाना की जनता सहित नेहा आर्य, गीतांशी,पंकज राठौर,अभय,आशीष, अनुराधा धामी सहित अनेक स्थानीय प्रतिभागियों ने भाग लिया।नमामि गंगे का यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि वेद, योग,पर्यावरण और सनातन संस्कृति की पुनर्प्रतिष्ठा का अभिनव प्रयास है जो भारत को अपनी मूल पहचान की ओर फिर से ले जा रहा है।

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