अल्मोड़ा-सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा द्वारा आज गणित विभाग में समान नागरिक संहिता विषय पर एकदिवसीय संवाद कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।कार्यक्रम के संरक्षक एवं अध्यक्ष रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट,मुख्य अतिथि रूप में मुख्य स्थाई अधिवक्ता उच्च न्यायालय चंद्रशेखर सिंह रावत, विशिष्ट अतिथि रूप में पूर्व कुलपति एवं संकाय अध्यक्ष,कला संकाय प्रोफेसर जगत सिंह बिष्ट,कार्यक्रम के वक्ता चामू सिंह घस्याल (अधिवक्ता न्यायिक सदस्य विद्युत नियामक आयोग अल्मोड़ा,पिथौरागढ़,बागेश्वर जनपद,वक्ता के रूप में विधि संकाय के आचार्य प्रोफेसर डी.के.भट्ट, कुलसचिव डॉ.देवेंद्र सिंह बिष्ट, आयोजन के संयोजक डॉ चंद्र प्रकाश फुलोरिया,सहसंयोजक पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के डॉक्टर ललित चंद्र जोशी ने द्वीप प्रज्ज्वलित कार्यक्रम का उद्घाटन किया।संयोजक डॉ चंद्र प्रकाश फुलोरिया ने बताया कि इस कार्यक्रम में विधि विशेषज्ञों एवं विद्वानों द्वारा समान नागरिक संहिता विषय पर मंथन करने के साथ विद्यार्थियों से संवाद किया गया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।कार्यक्रम के वक्ता चामू सिंह घस्याल अधिवक्ता न्यायिक सदस्य विद्युत नियामक आयोग अल्मोड़ा पिथौरागढ़, बागेश्वर जनपद ने कहा कि समान नागरिकता कानून को लागू करने वाला देश का पहला राज्य उत्तराखंड है।यह कानून सभी वर्ग, सभी जाति,सभी धर्म के लिए समानता की बात करता है।उन्होंने विवाह,उत्तराधिकार,भरण पोषण, सामाजिक सौहार्द आदि को लेकर इस कानून में समाहित विषयों की चर्चा की।वक्ता रूप में विधि संकाय के आचार्य प्रोफेसर डी.के. भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड में समान नागरिकता कानून सभी जनमानस को ध्यान में रखते हुए किया गया है।उन्होंने कहा कि विवाह से संबंधित विभिन्न प्रावधान जो पहले किसी न किसी रूप में संदेह के घेरे में थे उन सब को अब एक पैमाने से तोलने का जो अवसर मिला है वह समान नागरिकता कानून की एक बहुत बड़ी देन है। उन्होंने लिव इन रिलेशन से संबंधित प्रावधानों को भी उजागर किया और कहा कि लिव इन रिलेशन में यदि कोई भी जोड़ा अवैध रूप से रह रहा है तो उसके पुत्र को तो मान्यता मिल जाएगी लेकिन यदि उन्होंने समय पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो पति पत्नी के रूप में उनकी वैधता अवैध मानी जाएगी।मुख्य अतिथि रूप में मुख्य स्थाई अधिवक्ता उच्च न्यायालय के अधिवक्ता चंद्रशेखर सिंह रावत ने कहा कि समान नागरिकता कानून उत्तराखंड के द्वारा लागू किया गया है और यह देश का पहला राज्य है जिसने इसको कार्य रूप में परिणित किया है।समान नागरिकता कानून के विभिन्न प्रावधानों के बारे में उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि इस कानून के प्रभावी होने के बाद कोई भी व्यक्ति लिंग या जाति,धर्म के आधार पर अलग-अलग नहीं हैं।उन सभी को समान अधिकार मिल सकेंगे।इस हेतु इस कानून का विशेष महत्व है।उन्होंने पत्रकारिता एवं केंद्र को इस महत्वपूर्ण विषय पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बधाइयाँ दी।विशिष्ट अतिथि रूप में पूर्व कुलपति एवं संकाय अध्यक्ष,कला संकाय प्रोफेसर जगत सिंह बिष्ट ने समान नागरिकता कानून के व्यावहारिक पक्ष की चर्चा की।उन्होंने कहा हमारे गांव घरों में विभिन्न जाति एवं परंपराएं विद्यमान रहीं हैं जो अब सामाजिक कुरीतियां बन गई हैं। जिनको दूर करने में समान नागरिकता कानून महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12-35 और 25 से 28 तक शामिल उपबंधों की चर्चा कर धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक समानता, कर्त्तव्य एवं अधिकार आदि की चर्चा की। उन्होंने आगे कहा कि यह कानून समान रूप से लागू हो गया है। इससे लैंगिक समानता के साथ समाज में समानता बनी रहेगी।कार्यक्रम के संरक्षक एवं अध्यक्ष रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट ने कहा कि समान नागरिकता कानून के बारे में सभी को जानकारी हो सके इस हेतु संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।इसका उद्देश्य है कि विश्वविद्यालय की प्रत्येक व्यक्ति को इसकी जानकारी होगी तो हम सरलता के साथ अन्य लोगों को भी समान नागरिकता कानून से संबंधित सभी प्रावधानों के बारे में बता सकेंगे। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि इस संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी बढ़-चढ़कर के भागीदारी की। उन्होंने आयोजकों को इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के लिए बधाई दी। संवाद कार्यक्रम के सहसंयोजक पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के डॉक्टर ललित चंद्र जोशी ने सभी का आभार जताया।इस एक दिवसीय संवाद कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों से संवाद किया गया।विद्यार्थियों ने समान नागरिकता कानून को लेकर जानकारी प्राप्त की।इस अवसर पर डॉ ममता पंत,डॉ लल्लन कुमार सिंह, डॉक्टर कालीचरण,हर्षित रॉय,बबलू आगरी,कमल जोशी,कीर्ति पटेल, कमल सिंह,हिमांशु,विकास सिंह, मीनाक्षी आर्य,बबीता भारती ने सहयोग दिया।इस अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो शेखर चन्द्र जोशी,कुलानुशासक डॉ दीपक, प्रो रिजवाना सिद्धिकी (संकायाध्यक्ष शिक्षा),डॉ एच.आर. कौशल (संकायाध्यक्ष, वाणिज्य),
डॉ ममता पंत,डॉ माया गोला,डॉ बलवंत कुमार,प्रो संजीव आर्या, प्रो अमित कुमार पंत,प्रो. डी. पी. यादव, प्रोफेसर शालीमा तबस्सुम,डॉक्टर सबीहा नाज,डॉक्टर प्रतिभा फुलोरिया,डॉक्टर प्रोफेसर अरशद खान,डॉ दलवीर लाल,डॉ मनोज बिष्ट, डॉक्टर साक्षी तिवारी,डॉक्टर भक्तेश्वरी कार्की,डॉ गौरव कर्नाटक,डॉक्टर प्रियंका,डॉ गोकुल देवपा,डॉ लक्ष्मी वर्मा, डॉ प्रेमा, डॉ रवि कुमार, डॉक्टर फरहा दीवा, डॉ तिलक जोशी, डॉ नरेश पंत, डॉ पूरन जोशी, डॉ विजेता सत्याल, डॉ आरती परिहार, डॉक्टर पीएस बोरा, डॉ ममता जोशी, डॉ. खगेंद्र खोलिया, डॉ अर्चना लोहनी, डॉ विमल कांडपाल, डॉ योगेश मैनाली, डॉ हिमानी बिष्ट, डॉ सरिता पालनी, जीवन चन्द्र मठपाल सहित योग, पत्रकारिता, विधि, इतिहास सहित कई विभागों के विद्यार्थी, प्राध्यापक और कर्मचारी के साथ योग, एनसीसी 24 यूके गर्ल्स बटालियन, इतिहास विभाग, विधि पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग आदि की छात्र-छात्राएं उपस्थित थीं।


