अल्मोड़ा-सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग द्वारा ‘योग, विज्ञान एवं अध्यात्म’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी का मंगलवार को विधिवत समापन हुआ। संगोष्ठी का दूसरा दिन गंगा, वेद, विज्ञान और अध्यात्म को समर्पित रहा। विभिन्न तकनीकी सत्रों में गंगा स्वच्छता, नदियों के पुनरुद्धार, नदियों का सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व, योग व मनोविज्ञान, योग व संस्कृति, भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक चेतना से जुड़े विषयों पर देश-विदेश के शोधकर्ताओं द्वारा 103 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस अवसर पर बैंगलोर के डॉ. विकास रावत को ‘योगरत्न’, प्रो. रजनी नौटियाल को ‘योग तपस्विनी’ और डॉ. विनोद नौटियाल को ‘योगश्री’ सम्मान से नवाजा गया। लोकगायिका बसंती सामंत को लोकसंगीत में विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समापन सत्र में प्रो. जीवन सिंह रावत ने उत्तराखंड की नदियों की बदलती स्थिति पर चिंता जताते हुए जल संरक्षण की आवश्यकता बताई। प्रो. शेखर जोशी ने योग को मनोकामना पूर्ति का माध्यम बताया और विद्यार्थियों से योग के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। मुख्य अतिथि प्रो. विनोद नौटियाल ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस संगोष्ठी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज की है। समापन की अध्यक्षता कर रहीं प्रो. आराधना शुक्ला ने योग को आत्मिक विकास का माध्यम बताते हुए इसे जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इससे पूर्व दिनभर चले तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता प्रो. रजनी नौटियाल, प्रो. भीमा मनराल, प्रो. आराधना शुक्ला, प्रो. जीवन सिंह रावत सहित अन्य ने की। तीन समानांतर ऑनलाइन सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें देशभर के शिक्षाविद, शोधार्थी और विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया। संगोष्ठी का संचालन रजनीश जोशी, मीना और रेनू ने संयुक्त रूप से किया। आयोजन में डॉ. लल्लन कुमार सिंह, हेमलता अवस्थी, डॉ. गिरीश अधिकारी, डॉ. पूजा पांडे, भावना जोशी, आशीष संतोलिया सहित कई शिक्षकों और शोधार्थियों का सहयोग रहा। समापन अवसर पर विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, संकायाध्यक्ष, विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित रहे।

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