अल्मोड़ा-निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही दलबदल की राजनीति भी शुरू हो गई है। निकाय चुनाव के दौरान अल्मोड़ा में राजनीति के नये नये रंग देखने को मिल रहे हैं। अल्मोड़ा कांग्रेस में एक दिन पहले दूसरी पार्टी से सदस्यता लेने वाले भैरव गोस्वामी को मेयर का टिकट मिलने के बाद पार्टी के कई पदाधिकारियों में नाराजगी देखने को मिली। जिसके बाद पार्टी में इस्तीफे शुरू हो गए। किसी ने टिकट नहीं मिलने पर तो किसी ने बाहरी व्यक्ति को टिकट देने के नाम पर इस्तीफ़ा दिया। कुछ ने कांग्रेस छोड़ी तो आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष एवं पदाधिकारियों ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ले ली। 15 गारंटियों का दावा करने आम आदमी पार्टी ने अल्मोड़ा नगर निगम मेयर चुनाव में कोई प्रत्याशी तो नहीं उतारा लेकिन आप पार्टी की यूथ विंग ने कांग्रेस प्रत्याशी को अपना समर्थन देकर चौंका दिया। इधर विगत दिवस पूर्व दर्जामंत्री एवं वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री के हाथों भाजपा की सदस्यता लेकर सबको सकते में डाल दिया। वहीं रविवार के दिन चौंकाने वाला घटनाक्रम हुआ जिसमें वरिष्ठ कांग्रेसी नेता त्रिलोचन जोशी एवं मनोज सनवाल सहित एक दर्जन कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस को अलविदा कह भाजपा की सदस्यता ले ली। ये मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि कांग्रेस ने प्रैस वार्ता करके कांग्रेस के बागी अमन अंसारी को पुनः कांग्रेस में शामिल करवा लिया। इससे अल्मोड़ा मेयर पद पर जो त्रिकोणीय मुकाबला बना हुआ था अब वह सिर्फ और सिर्फ दो राष्ट्रीय पार्टियों भाजपा एवं कांग्रेस के बीच सिमट कर रह गया है। इस बार के चुनाव की ख़ास बात यह है कि नगर निगम चुनावों में दो दिग्गज पार्टियों भाजपा और कांग्रेस तथा एक निर्दलीय को छोड़कर कोई भी अन्य राष्ट्रीय, क्षेत्रीय दलों अथवा निर्दलीय ने दावेदारी नहीं की। भाजपा से बगावत करने वाले मनोज वर्मा और कांग्रेस से टिकट मांग रहे मदन मोहन वर्मा ने निर्दलीय नामांकन किया था और नामवापसी के अंतिम दिन भाजपा के पक्ष में नाम वापस ले लिया। कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने से कांग्रेस के बागी निर्दलीय अमन अंसारी ने कांग्रेस को वापस समर्थन देकर घर वापसी कर ली। मेयर के लिए 3 नामांकन होने के बावजूद अब मैदान में पारम्परिक प्रतिद्वंदी भाजपा और कांग्रेस ही रह गए हैं।अब यहाँ सीधा मुकाबला भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता अजय वर्मा और भाजपा से कांग्रेस में गए कांग्रेस के दावेदार भैरव गोस्वामी के बीच है। जहाँ एक तरफ भाजपा के साथ निर्दलीय नामांकन कर बाद में नाम वापस लेने वाले आ गए वहीं मैदान में इकलौते निर्दलीय ने कांग्रेस को समर्थन दिया है। रविवार को भाजपा में शामिल होने वाले त्रिलोचन जोशी ने पिछली बार कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय दावेदारी की थी व भाजपा, कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी थी और इस बार कांग्रेस से इस्तीफ़ा देकर खुलकर भाजपा के समर्थन में आ गए हैं। वहीं कांग्रेस से कुछ अन्य कद्दावर पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हो गए हैं।अल्मोड़ा नगर पालिका सीट पर जहाँ कांग्रेस या कांग्रेस से जुड़े प्रत्याशी का कब्ज़ा रहा है वहाँ इस बार नगर निगम बनने से भाजपा भी चाहती है कि अल्मोड़ा की पहली मेयर सीट के साथ खाता खोले। नगर निगम चुनाव में खाता खुलने के साथ भाजपा की ऐतिहासिक जीत होती है या कांग्रेस अपने सीट बचाए रखती है यह निर्णय जनता जनार्दन के हाथों में है। बहरहाल सिर्फ कयास ही लगाए जा सकते हैं और चुनाव से पहले, चुनाव तक कौन किसका साथ देता है यह देखने लायक होगा।
