अल्मोड़ा-उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ऐसे विभागों के पदों को भरा जाना नितांत आवश्यक है जहां पद रिक्त हो और पदोन्नति हेतु कार्मिक नहीं मिलते।ऐसे में शिथिलीकरण के द्वारा पद पूर्ति जरूरी है।पद रिक्त होने पर कार्य प्रभावित होते हैं।पद के लिए न्यूनतम अर्हता पूरी नहीं होने पर पद रिक्त रह जाता है और उसके बदले कोई कार्य व्यवस्था भी नहीं होती ऐसी स्थिति में शिथिलीकरण जरूरी है और शासन व सरकार द्वारा इसे हमेशा के लिए लागू करना चाहिए। लोक कल्याण कारी राज्य में प्रदत्त सुविधा को वापस नहीं लिया जाना चाहिए ऐसे में असंतोष स्वाभाविक है। उत्तराखंड सरकार द्वारा 30-6-24 तक के लिए ही शिथिलीकरण जारी किया है। इसके बाद शिथिलीकरण नहीं दिया इससे सदस्यों में रोष व्याप्त है। एजुकेशनल मिनिस्ट्रीयल आफीसर्स एसोसिएशन कुमाऊं मण्डल नैनीताल के पूर्व सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक ने बताया कि शिथिलीकरण नहीं मिलने से बड़ी संख्या में पद रिक्त हो रहे हैं और पद पूर्ति केवल पदोन्नति से संभव नहीं है क्योंकि निर्धारित अर्हता के लिए अलग अलग समय सीमा बनी हुई है। उत्तराखंड सरकार व शासन को शिथिलीकरण बहाल करना चाहिए ताकि अर्हकारी सेवा में पचास प्रतिशत छूट के साथ सदस्यों की पदोन्नति हो सकें। उत्तराखंड शासन द्वारा इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सूचना का अधिकार, सेवा का अधिकार व तमाम कार्य से वर्क लोड बढ़ा हुआ है और रोज नये नये फरमान जारी हो रहे हैं इसलिए शिथिलीकरण को आगे विस्तारित किया जाना चाहिए। उत्तराखंड सरकार व शासन द्वारा सूचना का अधिकार व सेवा के अधिकार के तहत किसी भी पद का सृजन नहीं किया और केवल राज्य सूचना आयोग बनाकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। कार्मिकों का अत्यधिक समय इसी कार्य में लगा रहता है।धीरेन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि यह गंभीर प्रश्न है और केवल इसी मुद्दे पर भविष्य में आंदोलन से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
