अल्मोड़ा-एन एम ओ पी एस उत्तराखंड के प्रांतीय कोर कमेटी सदस्य धीरेन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि दिनांक 26 सितंबर 2024 की रैली पुरानी पेंशन का रास्ता साफ करेगी और सरकार को पुरानी पेंशन बहाली के निर्णय हेतु बाध्य कर देगी। सरकार को गंभीरता से विचार कर पुरानी पेंशन बहाल कर देनी चाहिए। धीरेन्द्र कुमार पाठक प्रदेश कोर कमेटी सदस्य ने कहा की एन पी एस व यू पी एस दोनों तिलांजलि के योग्य है।केवल पुरानी पेंशन व्यवस्था से ही अधिकारियों,शिक्षकों व कार्मिको का भला होगा।हर शिक्षक,कार्मिक चाहते हैं कि उन्हें अपने वेतन का सेवानिवृत्ति के समय 50 प्रतिशत वेतन व मंहगाई पेंशन के रूप में चाहिए।वर्तमान में सरकार एन पी एस में 14 प्रतिशत अंशदान दे रही है और यू पी एस में 18 प्रतिशत की बात कह रही है लेकिन सब निजीकरण व्यवस्था के हवाले यह सिस्टम है और कभी भी डूब सकता है।मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री,सांसद,विधायक पुरानी पेंशन ले सकते हैं तो अधिकारियों,शिक्षकों व कार्मिको को पुरानी पेंशन व्यवस्था से क्यों महरूम किया गया है।यह शर्मनाक स्थिति है।अधिकारियों,शिक्षकों,कार्मिकों द्वारा पूर्ण मनोयोग के साथ कार्य किया जाता है लेकिन उसके बाद भी उन्हें पेंशन नहीं दिया जाना लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है।एन एम ओ पी एस द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय बंधु, प्रदेश अध्यक्ष जीतमणि पैन्युली व सचिव मुकेश रतूड़ी के निर्देश पर दिनांक 26 सितंबर को सम्पूर्ण भारतवर्ष में आंदोलन निर्धारित किया है जिसमें लाखों शिक्षक,कार्मिक सड़कों पर उतरेंगे।धीरेन्द्र कुमार पाठक प्रदेश कोर कमेटी सदस्य ने बताया कि वर्ष 1947 से आजादी के बाद से 2005 अक्टूबर तक सरकारों को पुरानी पेंशन देने में कोई परेशानी नहीं हुई।लेकिन अक्टूबर 2005 के बाद सरकार द्वारा जबरन एन पी एस लागू कर दिया जिसके तहत इतनी न्यून धनराशि पेंशन के रूप में बन रही है कि इससे बुढ़ापा चलाना मुश्किल हो गया है।विभिन्न वेतनमान में एक हजार से लेकर पांच हजार तक मामूली पेंशन निर्धारित हो रही है। इससे शिक्षकों,कार्मिकों में बहुत रोष व्याप्त है।लोकतंत्र में संविधान समानता का अधिकार प्रदान करता है और एक देश में दो विधान किसी भी तरह से अलोकतांत्रिक है।भारत के नेता सांसद,विधायक निर्वाचित होने के बाद पुरानी पेंशन के हकदार हैं लेकिन 20 से 35 वर्ष की सेवा करने वाले कार्मिकों के लिए पेंशन नहीं है इससे बड़ी विडम्बना और क्या हो सकती है यह यक्ष प्रश्न बन गया है। आर्मी, पुलिस, अर्धसैनिक बलों को भी पुरानी पेंशन से महरूम रखा गया है आखिर यह लोकतंत्र चलेगा कैसे। पुरानी पेंशन व्यवस्था से बाजार व्यवस्था भी बनी रहती है और पूंजी केवल शिक्षक,कार्मिक को नहीं बल्कि पूरे समाज में शिक्षक,कार्मिक के माध्यम से गति करती है क्योंकि शिक्षक व कार्मिकों जो भी धनराशि मिलती है उसे बाजार व्यवस्था में ही खर्च करते हैं और जिससे पूंजी बाजार का भी संतुलन बना रहता है।इसके विपरीत एन पी एस में धनराशि सरकारों द्वारा विभिन्न उपक्रमों में लगाई जाती है जिसका डूबने का भी खतरा रहता है और युद्ध होने की स्थिति में सम्पूर्ण धनराशि से भी हाथ धोना पड़ सकता है।भारत के सभी जनपदों में आक्रोश रैली पुरानी पेंशन का मार्ग प्रशस्त करेगी क्योंकि यू पी एस को सरकार एन एम एस के बाद थोपने की कोशिश कर रही है जिसे अधिकारियों शिक्षकों व कार्मिकों ने पूरी तरह से नकार दिया है।भारत का ढांचा अभी पूरी तरह से ग्रामीण अर्थव्यवस्था व पुरानी पेंशन व्यवस्था पर टिका हुआ है इसमें छेड़छाड़ से समाज में गंभीर विसंगति उत्पन्न हो रही है और शिक्षक कार्मिक सरकार की यू पी एस व एन पी एस व्यवस्था से हतप्रभ व निराश हैं और 2017 से लगातार सात वर्ष से आंदोलन की स्थिति में है।दिल्ली राजधानी क्षेत्र में भी लगभग 20 लाख कार्मिकों शिक्षकों की महारैली निकली थी सरकार द्वारा इसे मीडिया में दिखाने से भी रोक लगा दी गई लेकिन सोशल मीडिया ने धमाका मचाया और पूर्व विश्व में यह बात फैल गई।आजादी के बाद इसे सबसे बड़ी रैली करार दिया गया।नये कम बहुमत के बाद सरकार ने पुरानी पेंशन बहाली को समझने की कोशिश की किन्तु फिर भी यू पी एस पर अटक गए लेकिन अधिकारियों शिक्षकों व कार्मिकों द्वारा हर हाल में पुरानी पेंशन के लिए ही दम भरा जा रहा है और जब तक पुरानी पेंशन बहाली नहीं होगी कार्मिक किसी भी दशा में पीछे नहीं हटेंगे।भारत में नई संसद के गठन के बाद देखा गया कि विपक्षी सांसदों द्वारा भी इस पर जोरों से चर्चा की लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं हुआ लेकिन भारत सरकार वर्तमान में सोचने के लिए बाध्य हो गई है कि पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन के कारण ही उनकी सीटें कम हुई है।उत्तराखंड में भी देहरादून सहित सभी जनपदों में आक्रोश रैली निकाली जायेगी जिसकी पूर्ण तैयारी कर ली गई है और जनपदों में जिला अधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी व अभिसूचना इकाई को अवगत कराते हुए रैली स्थान निर्धारित कर दिए गए हैं और उन्हीं मार्गों पर आक्रोश रैली निकाली जायेगी। सरकार द्वारा इससे बाद भी निर्णय नहीं लिया गया तो चरणबद्ध तरीके से आंदोलन चलाया जाएगा।उत्तराखंड के सभी सहयोगी संगठनों के पदाधिकारियों व सदस्यों से भी अनुरोध रहेगा कि अधिक से अधिक संख्या में आक्रोश रैली में भागीदारी सुनिश्चित करें और सरकाऱों को पुरानी पेंशन बहाली के लिए बाध्य कर दें। सरकार के एन पी एस व यू पी एस जैसे निर्णय के विरोध व पुरानी पेंशन बहाली के समर्थन में आक्रोश रैली निकाली जायेगी।धीरेन्द्र कुमार पाठक प्रदेश कोर कमेटी सदस्य ने कहा कि इस आक्रोश रैली के बाद सरकार को निश्चित रूप से पुरानी पेंशन बहाली के बारे में निर्णय लेना ही पड़ेगा।भारत जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों वाले देश में यह कभी भी नहीं सोचा गया कि सरकार ऐसे लोकतंत्र विरोधी कदमों को भी उठायेगी और अपने लिए पुरानी पेंशन और अधिकारियों शिक्षकों कार्मिकों के भविष्य पर लात मारने की नीति के तहत एन पी एस व यू पी एस लागू करेगी।धीरेन्द्र कुमार पाठक प्रांतीय कोर कमेटी सदस्य ने कहा कि एन पी एस व यू पी एस अच्छी नीति है तो सरकार इसे पहले अपने सांसदों विधायकों पर लागू करें निश्चित रूप से वे भी सरकार का विरोध करेंगे।आक्रोश रैली आंदोलन की दशा व दिशा को निर्धारित करने के साथ साथ पुरानी पेंशन बहाली हेतु रास्ता भी साफ करेगी ऐसा विश्वास है।भारत में पांच राज्यों में अभी आंदोलन के कारण ही पुरानी पेंशन बहाली हुई है और कलकत्ता में पुरानी पेंशन पहले से ही लागू है।कलकत्ता राज्य ने कभी भी एन पी एस की बात नहीं की।धीरेन्द्र कुमार पाठक ने भारत में पुरानी पेंशन जैसी योजनाओं के बारे में सरकार ने नकारात्मक रूख पर चिंता व्यक्त की और कहा की इससे सरकार की नीति व रीति दोनों का पता चलता है इससे किस लोककल्याण कारी राज्य की स्थापना होगी शर्मनाक स्थिति है। उन्होंने कहा कि भगवान सरकारों को सद्बुद्धि प्रदान करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *