अल्मोड़ा-मां नंदा सुनंदा महिला संस्था ने आज अल्मोड़ा के एक होटल सभागार में तीज उत्सव बड़े धूमधाम के साथ मनाया जिसमें सैकड़ों महिलाओं ने प्रतिभाग किया।अतिथि के रूप में कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य लता बोरा, पूर्व पालिकाध्यक्ष शोभा जोशी,मीता जोशी उपस्थित रहे।समिति की अध्यक्ष किरन पंत ने कहा कि तीज का पर्व सुहाग से जुड़ा है।भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज के नाम से जाना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, घर की खुशहाली,संतान सुख के लिए व्रत रखकर शिव-पार्वती और निमड़ी माता की पूजा करती है।यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती की समर्पित होता है।इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य,पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए और अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस दिन का व्रत रखती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा अर्चना करती हैं।उन्होंने कहा कि इस दिन पारंपरिक तौर पर हरियाली तीज के दिन महिलाएं हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं क्योंकि हरा रंग बहुत ही शुभ माना जाता है।हरियाली तीज के दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार भी करती हैं।हरियाली तीज वह त्यौहार है जब सभी विवाहित हिंदू महिलाएं पारंपरिक कपड़े पहनती हैं और सोने के आभूषणों से सजती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं जिसमें हरे रंग की चूड़ियां पहनती हैं,सिंदूर लगाती हैं, मेहंदी लगाती हैं,पैरों में बिछिया और पायल आदि पहनती हैं और ये विवाह के सबसे शुभ प्रतीक हैं।व्यापार मंडल उपाध्यक्ष जया साह ने कहा कि तीज एक सामान्य नाम है जो तीन प्रकार के तीज त्यौहारों को संदर्भित करता है।श्रावण मास की अमावस्या के तीसरे दिन हरियाली तीज,15 दिन बाद कजरी तीज और 15 दिन बाद हरतालिका तीज।हरियाली तीज शाब्दिक अर्थ हरी तीज, जिसे सिंधारा तीज,छोटी तीज,श्रावण तीज या सावन तीज के नाम से भी जाना जाता है श्रावण मास की अमावस्या के तीसरे दिन आती है।यह उस दिन को चिह्नित करता है जब शिव ने देवी पार्वती की उनसे विवाह करने की इच्छा को स्वीकार किया था,जिसे विवाहित महिलाएं मनाती हैं,जो अपने मायके जाती हैं और झूला तैयार करती हैं जिस पर वे झूलती हैं और खुशी के तीज गीत गाती हैं।कजरी तीज शाब्दिक अर्थ काली तीज,जिसे बड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है।हरियाली तीज के 15 दिन बाद चंद्रमा के अंधेरे (बढ़ते हुए अर्धचंद्र) चरण के दौरान मनाई जाती है।हरतालिका तीज शाब्दिक रूप से हरत और आलिका का संयुक्त शब्द जिसका अर्थ है किसी महिला का उसकी सहेलियों द्वारा उसकी सहमति से अपहरण करना, भाद्रपद महीने में अमावस्या के तीसरे दिन हरियाली तीज के एक चंद्र महीने बाद आती है जो आमतौर पर गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले आती है।यह उस अवसर को चिह्नित करता है जब पार्वती ने अपने पिता हिमालय द्वारा शिव से विवाह करने के बाद उनसे बचने के लिए अपनी सहेलियों को उनका अपहरण करने के लिए प्रोत्साहित किया था।यह उन विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है जो अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत बिना पानी वाला उपवास रखती हैं।इस अवसर पर संस्था की अध्यक्ष किरण पंत,रीता पंत,पूनम बोरा,मीना जोशी,हेमा मटेला,जया जोशी,सोनिया कर्नाटक,बिंदु भंडारी, प्रतिभा वर्मा,लीला चौहान,सीमा गोसाई,अल्का नज्जौन,लीला साह,शोभा जोशी,जया साह सहित सैकड़ों महिलाएं उपस्थित रही।

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