अल्मोड़ा-उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन उत्तराखंड जनपद अल्मोड़ा के सचिव धीरेन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि सरकार मिनिस्टीरियल कार्मिकों की समस्या के निस्तारण के प्रति गंभीर नहीं है जबकि मिनिस्टीरियल संवर्ग सरकार की योजनाओं को अमली जामा पहनाने का काम करते हैं।उत्तराखंड शासन में संगठनों की फजीहत हो रही है।उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति द्वारा अक्टूबर 22 में हड़ताल स्थगित करना सभी को भारी पड़ रहा है।सरकार द्वारा कोई भी फैसला समय से नहीं लिया जा रहा है। लगातार सरकार व शासन संगठनों पर भारी पड़ रहे हैं।शिथिलीकरण शासनादेश कैबिनेट बैठक में आने के बाद भी शासनादेश जारी नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।चुनाव के इस वर्ष में सभी को शिथिलीकरण का लाभ मिलेगा यह भी संभव नहीं है।शासनादेश जारी होने के बाद विभागाध्यक्ष तक की कार्यवाही सदस्यों पर भारी पड़ रही है।शिथिलीकरण को सदा के लिए बहाल करना चाहिए।मंहगाई भत्ता 4 प्रतिशत की घोषणा नहीं करना भी नाराजगी का विषय है जबकि केन्द्र सरकार अब फिर से नये मंहगाई भत्ता की घोषणा करेगी।सरकार किसी भी मांग को ढंग से पूरा नहीं कर रही है।धरातल पर कोई भी मांग पूरी होती दिखाई नहीं दे रही है।फिलहाल तो सरकार व शासन द्वारा लगातार छल किया जा रहा है यह भी सोचनीय विषय है कि राज्य के विषय पर 94 दिन हड़ताल करने वाले कार्मिक अपने लिए हड़ताल नहीं कर सकते हैं। एक तरफ सरकार द्वारा मांगे नहीं मानी जा रही है दूसरी ओर हड़ताल पर भी रोक लगाई जा रही है। पुरानी पेंशन बहाली पर भी सरकार मौन है जबकि यह सेवानिवृत्त होने के बाद जीवन यापन से संबंधित हैं।मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों के कार्य व उत्तरदायित्व का प्रख्यापन आहरण वितरण अधिकार प्रदान करना,21 सूत्रीय मांगों का निराकरण सभी पर निर्णय लेना होगा।लोकतंत्र में सरकार को भी कार्मिको के प्रति जबावदेही रखनी होगी।संगठन के अध्यक्ष डॉ मनोज कुमार जोशी द्वारा भी मिनिस्टीरियल संवर्ग की सभी मांगों पर शासनादेश जारी करने की मांग की गई है।
