दन्यां-श्रीमद्भागवत कथा चारों वेद, अठारह पुराण और समस्त शास्त्रों का निचोड़ है। भागवत कथा श्रवण का सुअवसर भगवान के अनन्य भक्तों को ही प्राप्त होता है। कथा श्रवण के उपरांत प्राप्त ज्ञान को हमें अपने जीवन में अवश्य आत्मसात करना चाहिए।यह बात कथा व्यास गोविंद बल्लभ पंत ने प्राचीन उर्धेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागत कथा प्रवचन के दौरान कही। कथा व्यास ने बताया कि वेदों के सम्पूर्ण ज्ञान को चार भागों में विभाजित करने करने और सत्रह पुराणों की रचान के उपरांत वेद व्यास जी ने श्रीमद्भागवत की रचना की थी। वेद व्यास ने जन कल्याण की भावना को ध्यान में रखते हुए अठारहवें पुराण श्रीमद्भागवत की रचना सरल भाषा में की है। यह पावन ग्रंथ वेद, पुराण और समस्त शास्त्रों का निचोड़ है। कथा वाचक पंत ने श्रीमद्भागवत पुराण को भारतीय वांग्मय का मुकुट मणि बताते हुए कहा कि इसकी पावन कथाओं के श्रवण से सच्चिदानंद की अनुभूति प्राप्त होती है।मंदिर परिसर में सभी श्रोताओं ने किया सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण किया।उर्धेश्वर महादेव मंदिर में भागवत कथा के दौरान भंडारे का भी आयोजन किया जा रहा है। दन्यां के समस्त व्यापारी और सामाजिक कार्यकर्ता भंडारे के आयोजन में आर्थिक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। कथा श्रवण के बाद सभी श्रोतागण सामूहिक रूप से भगवान का प्रसाद भी ग्रहण कर रहे हैं।
