दन्यां-वेद व्यास द्वारा रचित श्रीमद्भागवत की कथाएं सहज मार्ग का अवलोकन कराती हैं।भागवत कथा के सभी प्रसंगों से प्राप्त ज्ञान को हमें अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए।यह बात कथा व्यास गोविंद बल्लभ पंत ने प्राचीन उर्धेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागत कथा प्रवचन के दौरान कही। कथा व्यास ने बताया कि वेदों के सम्पूर्ण ज्ञान को चार भागों में विभाजित करने करने और सत्रह पुराणों की रचान के उपरांत वेद व्यास जी ने श्रीमद्भागवत की रचना की थी। वेद व्यास ने जन कल्याण की भावना को ध्यान में रखते हुए अठारहवें पुराण श्रीमद्भागवत की रचना सरल भाषा में की है। कथा वाचक पंत ने इस पुराण को भारतीय वांग्मय का मुकुट मणि बताते हुए वर्णित ज्ञान को अपने जीवन में आत्मसात करने की अपील श्रोताओं से की है। मुख्य यजमान बसंत जोशी, पुजारी लीलाधर जोशी सहित दन्यां के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में प्रतिदिन आने की अपील की है।

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