अल्मोड़ा-आज गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर मानस पब्लिक स्कूल अल्मोड़ा में प्रातः 6 बजे से हवन,यज्ञ,पूजा कर ईश्वर का स्मरण कर गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुओं को याद कर गुरु की महिमा पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित कराई गई। भाषण का विषय गुरु की महिमा रखा गया था जिसमें मानस पब्लिक स्कूल के दर्जनों बच्चों छात्र छात्राओं ने प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया।प्रतियोगिता के आयोजन हेतु पतंजलि योगपीठ हरिद्वार शाखा अल्मोड़ा के पदाधिकारियों,विभिन्न संगठन के जिला प्रभारियों द्वारा इस आयोजन में सहभागिता कर प्रतियोगिता के प्रथम चार सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त कर्ताओं को नगद पुरस्कार राशि देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में श्रीमती माया भोज जिला प्रभारी महिला पतंजलि योगपीठ अल्मोड़ा,श्रीमती तुलसी सिराड़ी संगठन मंत्री पतंजलि योगपीठ अल्मोड़ा,कमल कुमार बिष्ट जिला युवा प्रभारी पतंजलि योगपीठ अल्मोड़ा,रूप सिंह बिष्ट जिला प्रभारी भारत स्वाभिमान,जसोद सिंह बिष्ट राज्य प्रभारी किसान सेवा समिति उत्तराखंड,मानस पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती मंजू बिष्ट, शिक्षिकाएं कुमारी दीक्षा कांडपाल,अन्नत बिष्ट ,कृपाल सिंह उपस्थित रहे।भाषण प्रतियोगिता में अवनि बिष्ट कक्षा सात की छात्रा,प्रतीक बिष्ट कक्षा 5 के छात्र ने प्रथम स्थान‌ संयुक्त रूप से,आदित्य कलोनी कक्षा 6 के छात्र ने द्वितीय स्थान एवं अवनी कक्षा तीन की छात्रा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।साथ ही सत्यम कांडपाल को सांत्वना पुरस्कार देकर बतौर विशिष्ट अतिथि हरीश चन्द्र,जसोद सिंह बिष्ट,रूप सिंह बिष्ट ने पुरस्कार देकर प्रतिभागियों विजेताओं को नगद राशि से सम्मानित किया।इस अवसर पर राज्य प्रभारी जसोद सिंह बिष्ट एवं रूप सिंह बिष्ट द्वारा अपने संबोधन में गुरु की महिमा एवं महत्व को रेखांकित कर गुरु के बताए अनुसार मार्ग पर उनकी शिक्षा और उनके अनुभव को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ने और सकारात्मक होकर सफलता प्राप्त करने की बात पर बल दिया।साथ ही मानस पब्लिक स्कूल अल्मोड़ा की प्रधानाचार्य श्रीमती मंजू बिष्ट ने इस तरह की प्रतियोगिताओं को आयोजित कर छात्राओं को आगे आने का अवसर प्रदान करने और गुरु के महत्व को समझने का और उनके सम्मान में उनके द्वारा बताइए रास्ते पर चलने के लिए प्रतिभागियों और उपस्थित जनों का आह्वाहन किया।अपने संबोधन में कहा कमल कुमार बिष्ट ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया और इस तरह के आयोजनों का महत्व समझते हुए गुरु की महिमा और गुरु के ज्ञान को आत्मसात कर आज के इस वातावरण में अपने आप को सुरक्षित करते हुए सत्य पथ मार्ग पर चलने की जरूरत पर बल दिया।

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