दन्यां-दो दिनों के लिए अपने गांव आई दीक्षिता जोशी रविवार को परिवार सहित अल्मोड़ा को रवाना हुई। फल्यांठ और आस पास के ग्रामीणों ने शुभ आशीर्वाद के साथ होनहार बालिका को विदा किया।
यूपीएससी की परीक्षा में 58 वीं रैंक प्राप्त करने वाली दीक्षिता जोशी शुक्रवार को अपने परिवार के साथ अपने पैतृक गांव फल्यांठ पहुंची। उन्होंने गांव में स्थापित गोलू, गंगनाथ और चापड़ सैम सहित अपने घर के ईष्ट देवताओं के मंदिरों में सपरिवार पूजा की। अल्मोड़ा को जाते समय ठेठ कुमाउंनी में जागरण से बातचीत करते हुए दीक्षिता बोली हमार गौंक द्याप्त गोल्ल, गंगनाथ और चापड़ सैम ज्यूकि हमन पर भौत किरपा छु। रिजल्ट मिलते ही हम सपरिवार आपण इष्ट देवतानकि पुजपाठ करणहुं आयां। (हमारे परिवार पर गोलू, गंगनाथ, चापड़ सैम सहित अपने ईष्ट देवताओं की अपार कृपा है।) गांव से विदाई के समय पूर्व ग्राम प्रधान आनंद जोशी, पूर्व बीडीसी सदस्य गणेश पाण्डेय, मंजू जोशी, चाचा नवीन जोशी, चाची पुष्पा जोशी, आदि जोशी, आयुष जोशी, डीसीबी के पूर्व अध्यक्ष प्रशांत भैसोड़ा, बीडीसी सदस्य दिनेश जोशी, कपिल जोशी, हुकुम सिंह, पूरन बिष्ट सहित अनेक लोगों ने दीक्षिता, उसके पिता वाईके जोशी और मां दीपा जोशी को विदा किया।दादी दीपा बोली, पोथी खूब नाम कमाये।दीक्षिता जोशी की 75 वर्षीय दादी दीपा जोशी ने विदा करते समय सभी को मिठाई खिलाई। अपनी नातिन को आशीर्वाद देते हुए कुमाउंनी में बोली पोथी जा बेर आए, खूब नाम कमाएं। दादी की आंखों में खुशी के आसूं देखकर दीक्षिता की आंखे भी नम हो गई।दीक्षिता ने बताया कि वह दो साल पहले गांव आई थी। उस दौरान हिसालू और काफल पके नहीं थे। इस बार मैंने फल्यांठ गांव में अपने हाथों से तोड़कर हिसालु खाए। गांव के बच्चों द्वारा पास के जंगल से लाए काफल भी खूब खाए। उन्होंने दुबारा काफलों के सीजन में गांव आने का वादा करते हुए सभी से विदा मांगी।
 

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