अल्मोड़ा-धीरेन्द्र कुमार पाठक प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एनएमओपीएस उत्तराखंड ने जारी एक बयान में कहा कि उत्तराखंड में भी पुरानी पेंशन बहाली के लिए धरातल पर आंदोलन की जरूरत है तभी राज्य सरकार पर कोई असर होगा।आंदोलन पहली व आखिरी अनिवार्य शर्त है और रहेगी। दूसरे राज्यों में पेंशन लागू हो रही है केवल इस आधार पर उत्तराखंड सरकार देने से रही।जो सरकारें शिथिलीकरण,एसीपी,गृह जनपद आबंटन,पदोन्नति में टंकण जैसे सामान्य फैसलों को दबा कर बैठी हो ऐसी सोच की सरकार से बिना जमीनी संघर्ष के पुरानी पेंशन बहाली की बात करना अपने आपको धोखे में रखना ही।उत्तराखंड सरकार का रवैया ठीक नहीं है।पुरानी पेंशन बहाली के लिए राज्य के कोने कोने में आंदोलन की आवश्यकता है।इस बात को स्वीकार कर आगे बढ़ना होगा अन्यथा पंचवर्षीय योजना तक इसी बात की रट लगाने से कुछ हासिल होगा नहीं।समझौते से इस महत्त्वपूर्ण मांग को पूरा नहीं किया जा सकता है।आंदोलन का बिगुल फूंकना ही होगा।एनएमओ पीएस उत्तराखंड के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य धीरेन्द्र कुमार पाठक द्वारा एनएमओपीएस उत्तराखंड के अध्यक्ष जीतमणि पैन्यूली व सचिव मुकेश रतूड़ी से मांग की है कि मुख्यमंत्री को इस आशय का नोटिस जारी किया जाय कि निर्धारित तिथि तक पुरानी पेंशन बहाली नहीं होने पर उत्तराखंड में भी राज्यव्यापी चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।उत्तराखंड राज्य हड़ताल से बना हुआ प्रदेश है। यहां के अधिकारी व नेता केवल हड़ताल की परिभाषा जानते हैं और दबाव में ही कार्य करने की आदत लिए हुए हैं।सेवा में श्रीमान कहकर लिखे गए पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है और सूचना अधिकार मांगने पर भी लिखकर दे देते हैं कि कोई कार्रवाई नहीं हुई।ऐसी स्थिति में उत्तराखंड में सभी जनपदों में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाय जिससे इस मांग को पूरा किया जा सके।आज लगभग सभी संगठनों के मांग पत्र में भी यह मांग पुरानी पेंशन की बहाली शामिल हैं।एजुकेशनल मिनिस्ट्रीयल आफीसर्स एसोसिएशन कुमाऊं मण्डल नैनीताल के अध्यक्ष जगमोहन सिंह खाती,जिलाध्यक्ष अल्मोड़ा पुष्कर सिंह भैसोड़ा,नैनीताल अध्यक्ष हरिशंकर सिंह नेगी,सचिव अल्मोड़ा मुकेश जोशी द्वारा भी इस मांग को पूरा करने की मांग की गई है है।उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन अल्मोड़ा के जिला अध्यक्ष डॉ मनोज जोशी व वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेन्द्र गुसाईं द्वारा भी इस मांग को पूरा करने की मांग की गई है।एनएमओपीएस उत्तराखंड के प्रांतीय पदाधिकारी धीरेन्द्र कुमार पाठक द्वारा बताया गया कि तीन बार दिल्ली में रैलियां आयोजित की गई और लंबे समय से शिक्षक कार्मिक इस आंदोलन के लिए संघर्षरत है।अभी हाल में ही कई राज्यों की सरकारों द्वारा इस मांग को पूरा किया गया है लेकिन उत्तराखंड सरकार को कोई असर नहीं हो रहा है।लंबे समय से शिक्षक,कार्मिक मानसिक तनाव की स्थिति में है ऐसे में एक बार राज्य व्यापी आंदोलन कर आर पार का संघर्ष करने के लिए आंदोलन की रूपरेखा तय करने की लिये श्री पाठक द्वारा शीर्ष पदाधिकारियों से निवेदन किया जा रहा है।

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