जागेश्वर-आज जारी एक बयान में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवम् जागेश्वर विधायक गोविन्द सिंह कुंजवाल ने कहा कि आज पूरे प्रदेशवासी उत्तराखंड राज्य का इक्कीसवां स्थापना दिवस मना रहे हैं।इस अवसर पर श्री कुंजवाल ने समस्त प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य को बने हुए बीस साल पूरे हो गये हैं।इन बीस सालों में प्रदेश को सात मुख्यमंत्री मिले।आज के दिन उनसब के कार्यों के बारे में विचार करने की आवश्यकता है कि इस नये राज्य का विकास व आम जनता की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ किस मुख्यमंत्री के कार्यकाल में अधिक हुआ है।उसको सोच समझकर विचार कर आपस में चर्चा की जानी चाहिए ताकि प्रदेश का आमजन आज तक की सरकारों के कामों का सही आकलन कर सके।उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ा दुर्भाग्य है कि बीस सालों में भी उत्तराखंड राज्य की स्थाई राजधानी का निर्णय सरकारें नहीं कर पाई।पिछली कांंग्रेस सरकार ने राज्य आन्दोलनकारियों व आमजनता की भावनाओं को मद्देनजर रखते हुए गैरसैंण में उन तमाम सुविधाओं को स्थापित करने का काम किया जो स्थाई राजधानी के लिए जरूरी थे।उन्होंने कहा कि वे मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को आज के दिन मिनी सचिवालय के भवनों का शिलान्यास करने के उपलक्ष्य में बधाई देते हैं व उन्हें यह भी याद दिलाना चाहते हैं कि मिनी सचिवालय के लिए पचपन करोड़ रूपये की स्वीकृति का शासनादेश पिछली कांंग्रेस की सरकार द्वारा किया गया था तथा निर्माण एजेन्सी को कुछ धनराशि अवमुक्त भी हो चुकी थी।भराड़ीसैण में जो पशुपालन का केन्द्र है उसको दूसरी जगह स्थानान्तरित करके उस जमीन को मिनी सचिवालय के नाम ट्रान्सफर किया जाना था।क्योंकि आचार संहिता लगने के कारण उक्त जमीन ट्रान्सफर नहीं हो पाई थी।यदि अब ट्रान्सफर कर दी गयी हो तो इसके लिए वे सरकार को बधाई देते हैं।यदि बगैर जमीन ट्रान्सफर हुए केवल पिछले शासनादेश के आधार पर शिलान्यास हो रहा है तो फिर उत्तराखंड वासियों के साथ बड़ा धोखा होगा।